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गुरुदेव हर सीमा से परे थे- टैगोर सांस्कृतिक सद्भावना पुरस्कार में प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर हर सीमा से परे थे। गुरुदेव प्रकृति और मानवता के प्रति समर्पित थे। नई दिल्ली में टैगोर सांस्कृतिक सद्भावना पुरस्कार समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संस्कृति की विरासत किसी भी राष्ट्र की एक अद्वितीय पूंजी होती है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर से लेकर स्वामी विवेकानंद और सरदार पटेल जैसे अनेकों महापुरुषों ने देश की एकता और सांस्कृतिक विरासत में अहम योगदान दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत के पास तो हजारों वर्षों का एक सांस्कृतिक विस्तार है, जिसने गुलामी के लंबे कालखंड का, बाहरी आक्रमण का भी बिना प्रभावित हुए सामना किया है। ये अगर संभव हो पाया है तो उसके पीछे स्वामी विवेकानंद जी और गुरुदेव जैसे अनेक मनीषियों का योगदान रहा है। भारत का सांस्कृतिक सामर्थ्य एक रंग-बिरंगी माला जैसा है, जिसको उसके अलग-अलग मनकों के अलग-अलग रंग शक्ति देते हैं। कोस-कोस पर बदले पानी चार कोस पर बानी यही भारत को बहुरंगी और बहुआयामी बनाते हैं। भारत की इसी शक्ति को गुरुदेव ने समझा और रबिंद्र संगीत में इस विविधता को समेटा। रबिंद्र संगीत में पूरे भारत के रंग हैं और ये भाषा के बंधन से भी परे है।’

उन्होने कहा कि भारत ने कई संकटों का मुकाबला अपनी समृद्ध परंपरा की बदौलत ही किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गुरुदेव के सेवा भाव की कामना को बनाए रखने की जरूरत है।

प्रवासी भारतीय केंद्र में साल 2014, 2015 और 2016 के लिए पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। सन 2014 के लिए टैगोर सांस्कृतिक सद्भावना पुरस्कार मणिपुरी नृत्य के गुरु और लेखक राजकुमार सिंहजीत को प्रदान किया गया।

बांग्लादेश के एक सांस्कृतिक समूह ‘छायानट’ को टैगोर की कला, संगीत, शिक्षा और संस्कृति के प्रसार में अहम योगदान देने के लिए पुरस्कार दिया गया। सन 2016 के लिए टैगोर सांस्कृतिक सद्भावना पुरस्कार दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार रामवंजी सूतार को दिया गया।

पुरस्कार के रूप में एक करोड़ की राशि, प्रशस्ति पत्र और हस्तशिल्प से बनी एक कलाकृति प्रदान की गई। इस समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई प्रमुख लोगों ने शिरकत की।

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