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थाईलैंड के प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी को कहा शुक्रिया, जानिए क्यों

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का मान पूरी दुनिया में बढ़ा है। मोदी सरकारी की नीतियों से भारत ने तकनीकी क्षेत्र में जो तरक्की की है, उसी का असर है कि आज दुनिया में कहीं भी कोई आपदा आने पर भारत से मदद की उम्मीद की जाती है। थाईलैंड में थैल लुआंग गुफा में अंडर-16 फुटबाल टीम के 12 बच्चे और कोच के फंसने के बाद पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया। दुनिया में अब तक के सबसे जोखिम भरे राहत और बचाव अभियान में ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, अमेरिका समेत तमाम देशों ने अपने विशेषज्ञ भेजे। पर इनसे कोई बात नहीं बनी तो थाईलैंड की सरकार ने भारत की मोदी सरकार से मदद की गुहार की।

भारत से भेजे गए हैवी फ्लडपंप से निकाला गया था गुफा का पानी
मोदी सरकार ने बगैर समय गंवाए भारतीय इंजीनियरों को मदद करने का निर्देश दिया। भारत सरकार के आदेश पर केबीएस का हैवी फ्लडपंप महाराष्ट्र के सांगली जिले स्थित किर्लोस्कर समूह की कंपनी से भेजा गया। किर्लोस्कर कंपनी के डिजाइनर हेड प्रसाद कुलकर्णी बीते शुक्रवार की रात को हैवी फ्लडपंप लेकर थाईलैंड रवाना हुए थे। भारत से हैवी कैबीएस फ्लडपंप थाईलैंड पहुंचने के बाद, गुफा में पानी का स्तर कम किया गया। पानी का स्तर कम होने के बाद ही गोताखोरों का काम आसान हुआ और तीन दिनों के कठिन ऑपरेशन के बाद सभी बच्चों और उनके कोच को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अब थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रत्युथ चान ओचा ने पीएम मोदी को मदद के लिए शुक्रिया कहा है। उन्होंने कहा है कि मुश्किल वक्त में भारत की मदद के लिए थाईलैंड सरकार हमेशा अहसानमंद रहेगी।

यह कोई पहला वाकया नहीं है, इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में भारत की सेना, आपदा बचाव दल कई देशों में इसी तरह के अभियान चलाकर विपत्ति में फंसे लोगों की मदद कर चुके हैं। डालते हैं एक नजर-

यमन संकट के दौरान विश्व ने माना भारत का लोहा 
जुलाई 2015 में यमन गृहयुद्ध की चपेट में था और सुलगते यमन में पांच हजार से ज्यादा भारतीय फंसे हुए थे। बम गोलों और गोलियों के बीच हिंसाग्रस्त देश से भारतीयों को सुरक्षित निकालना मुश्किल लग रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व और विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह के सम्यक प्रबंधन और अगुआई ने कमाल कर दिया। भारतीय नौसेना, वायुसेना और विदेश मंत्रालय के बेहतर समन्वय से भारत के करीब पांच हजार नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया वहीं 25 देशों के 232 नागरिकों की भी जान बचाने में भारत को कामयाबी मिली। इस सफलता ने विश्वमंच पर भारत का लोहा मानने के लिए सबको मजबूर कर दिया।

मालदीव के लोगों की प्यास बुझाई
दिसंबर 2014 में मालदीव का वाटर प्लांट जल गया और पूरे देश में पीने के पानी की किल्लत हो गई। वहां त्राहिमाम मच गया और आपातकाल की घोषणा कर दी गई। तब भारत ने पड़ोसी का फर्ज अदा किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्वरित फैसला लिया। मालदीव को पानी भेजने का निर्णय कर लिया गया और इंडियन एयर फोर्स के 5 विमान और नेवी शिप के जरिये पानी पहुंचाया जाने लगा।

नेपाल भूकंप में राहत का अद्भुत उदाहरण
27 अप्रैल, 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए। नेपाल में जिस तेजी से मदद पहुंचाई गई वो अद्भुत था। भारतीय आपदा प्रबंधन की टीम ने हजारों जानें बचाईं। सबसे खास रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय का नेपाल सरकार से बेहतरीन समन्वय रहा। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

अफगानिस्तान में भूकंप में राहत
अक्टूबर 2015 को अफगानिस्तान-पाकिस्तान में 7.5 तीव्रता के भूकंप के चलते 300 लोगों के मौत हो गई। पीएम मोदी ने तत्काल दोनों देशों को मदद की पेशकश की। अफगानिस्तान में भारतीय राहत टीम को बिना देर किए रवाना किया गया और मलबे में फंसे सैकड़ों लोगों को निकालने में सफलता पायी।

सऊदी अरब में फंसे हजारों भारतीयों को निकाला
सऊदी अरब में गलत हाथों में जाकर फंसे करीब 20 हजार भारतीय तीन महीने के भीतर अपने वतन वापस लौट पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के प्रयास से सऊदी अरब सरकार ने भारतीयों को 90 दिन के लिए ‘राजमाफी’ दी है। ‘राजमाफी’ के तहत 20 हजार से ज्यादा लोगों ने भारत लौटने के लिए अर्जी दाखिल की थी।

बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए भेजी राहत
सितंबर,2017 में भारत ने बांग्लादेश में म्यांमार से आए रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए राहत सामग्री भेजी थी। बांग्लादेश के मदद मांगने पर बिना देर किए भारत ने चावल, गेहूं, दाल, चीनी, नमक, खाद्य तेल, नूड्ल्स, बिस्किट, मच्छरदानी वगैरह की पहली खेप के साथ वायु सेना का विमान भेज दिया। विदेश मंत्रालय की निगरानी में ‘ऑपरेशन इंसानियत’ नाम से वहां राहत कार्यक्रम चलाया गया।

श्रीलंका ईंधन संकट: संकटमोचक बनी मोदी सरकार
श्रीलंका को नवंबर, 2017 में पेट्रोल और डीजल की जबरदस्त किल्लत का सामना करना पड़ा। श्रीलंका में ईंधन की कमी के बीच राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बताया कि भारत, श्रीलंका को अतिरिक्त ईंधन भेज रहा है और विकास में सहयोग के लिए भारत के सतत समर्थन का भरोसा भी दिलाया। इसके पहले मई,2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकटग्रस्त श्रीलंका के लिए राहत भेजी थी। यहां दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने भारी तबाही मचायी थी, जिसमें 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे और 90 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश का दुनिया में जो स्थान बना है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। प्रधानमंत्री मोदी के कारण दुनियाभर में भारत का रुतबा बढ़ा है

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष ने की भारत के योगदान की सराहना
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लजकाक ने संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों में भारत के योगदान की सराहना की है। अध्यक्ष लजकाक ने स्लोवाकिया में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर के साथ बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों में भारत के योगदान और प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। लजकाक और अकबर ने 18 मई को ग्लोबसेक 2018 ब्राटिस्लाव फोरम से इतर मुलाकात की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष ने कहा कि, ‘मैं संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा अभियानों में भारत की प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं।’ संयुक्त राष्ट्र के 71 में से 50 शांति रक्षा अभियानों में भारत ने पिछले छह दशकों में करीब 200,000 सैनिकों को भेजा है।

UN में दिखा भारत का दबदबा
प्रधानमंत्री मोदी के सक्षम नेतृत्व की बदौलत संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी जीत तब मिली जब दलवीर भंडारी लगातार दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज बन गए। दलवीर भंडारी का मुकाबला ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था, लेकिन आखिरी दौर में अपनी हार देखते हुए उन्हें नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। गौर करें तो यह जीत भंडारी की नहीं बल्कि भारत के उस बढ़े कद की है जो पिछले तीन सालों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बढ़ा है। कभी दुनिया पर राज करने वाला ब्रिटेन आज भारत के सामने बौना साबित हो रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से ‘अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन’ बना
सारी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए चिंता जता रही थी, लेकिन भारत की पहल पर ही वैश्विक स्तर पर अमेरिका और फ्रांस के साथ इसके लिए इनोवेशन की तरफ कदम बढ़ाया गया। 26 जनवरी, 2016 को गुरुग्राम में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (आईएसए) के अंतरिम सचिवालय का उद्घाटन किया तो एक ‘नये अध्याय’ की शुरुआत हुई। दरअसल ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई पहल का परिणाम है और इसकी घोषणा भारत और फ्रांस द्वारा 30 नवंबर 2015 को पेरिस में की गई थी। आईएसए के गठन का लक्ष्य सौर संसाधन समृद्ध देशों में सौर ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना और इसे बढ़ावा देना है। अब तक इस मंच से दुनिया के 36 से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

योग को वैश्विक पहचान दिलाई
21 जून, 2015- ये वो तारीख है जो स्वयं ही एक यादगार तिथि बनकर इतिहास का हिस्सा बन गई है। इसी दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आगाज हुआ और पूरी दुनिया में भारत का डंका बजने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को आज पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है। दुनिया के 192 देशों के लोगों ने भारत की प्राचीन विरासत को अपनाया तो हर हिंदुस्तानी का मस्तक ऊंचा हो गया। पूरा विश्व जब एक साथ सूर्य नमस्कार और अन्य योगासनों के जरिये ‘स्वस्थ तन और स्वस्थ मन’ के इस अभियान से जुड़ा तो हर एक भारतवासी के लिए ये अद्भुत अहसास का दिन बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुहिम से आज भारत की इस प्राचीन विरासत की ताकत का अहसास पूरी दुनिया को हो रहा है।

डोकलाम पर दुनिया ने देखा भारत का सामर्थ्य
अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के डायरेक्टर माइकल पिल्स्बरी नो कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के समक्ष मोदी अकेले खड़े हैं। दरअसल ये टिप्पणी उन्होंने ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को ध्यान में रखते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ मुखर रही है। दरअसल अमेरिकी थिंक टैंक का मानना बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत ने चीन को डोकलाम विवाद में भी अपनी दृढ़ता का परिचय करा दिया है और चीन को अपनी सेना को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा। चीन ने भारत को युद्ध की भी धमकी दी लेकिन पीएम मोदी की नीतियों से चीन अकेला हो गया और पश्चिमी देशों ने उसे संयम बरतने की सलाह दी। अमेरिका, फ्रांस, जापान, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भारत के साथ खड़े रहे।

आतंकवाद के खिलाफ विश्व को किया एकजुट 
पीएम मोदी दुनिया के हर मंच से आतंकवाद के विरुद्ध मुखर रहे हैं। उन्होंने आतंकवाद के मसले पर एक के बाद एक हमले बोले और विश्व के अधिकतर देशों को ये समझाने में कामयाब रहे हैं कि दुनिया में अच्छा और बुरा आतंकवाद नहीं होता, बल्कि आतंकवाद सिर्फ आतंकवाद है। आज अमेरिका, रूस, जापान, जर्मनी, यूरोपियन यूनियन और इजरायल जैसे देश भारत के इस पक्ष के साथ खड़े हैं। कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों पर अमेरिकी रोक और सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों पर बैन भारत के बढ़े हुए प्रभुत्व का ही परिणाम है। दरअसल विश्व के कई देश आतंकवाद और कट्टरपंथ से परेशान हैं जिसे पीएम मोदी ने दुनिया के सामने चुनौती के तौर पर पेश किया है। दुनिया के अधिकतर देश पीएम मोदी के आतंकवाद विरोधी अभियान के साथ हैं।

अंतरिक्ष के माध्यम से कूटनीति की नई उड़ान 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उम्दा कूटनीति की मिसाल है दक्षिण एशिया संचार उपग्रह। इसकी पेशकश उन्होंने 2014 में काठमांडू में हुए सार्क सम्मेलन में की थी। यह उपग्रह सार्क देशों को भारत का तोहफा है। सार्क के आठ सदस्य देशों में से सात यानी भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और मालदीव इस परियोजना का हिस्सा बने जबकि पाकिस्तान ने अपने को इससे यह कहकर अलग कर लिया कि इसकी उसे जरूरत नहीं है वह अंतरिक्ष तकनीक में सक्षम है। 5 मई 2017 के सफल प्रक्षेपण के बाद इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जिस तरह खुशी का इजहार करते हुए भारत का शुक्रिया अदा किया उससे उपग्रह से जुड़ी कूटनीतिक कामयाबी का संकेत मिल जाता है। लेकिन पाकिस्तान ने अपने अलग-थलग पड़ने का दोष भारत पर यह कहते हुए मढ़ दिया कि भारत परियोजना को साझा तौर पर आगे बढ़ाने को राजी नहीं था।

विश्व को पाकिस्तान का असली चेहरा दिखाया
मोदी सरकार की स्पष्ट और दूरदर्शी विदेशनीति के प्रभाव से पाकिस्तान विश्व बिरादरी में अलग-थलग पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में ऐसा घिरा है कि उसे विश्व पटल पर भारत के खिलाफ अपने साथ खड़ा होने वाला कोई एक सहयोगी देश नहीं मिल रहा। चीन तक भारत के खिलाफ उसका साथ देने को तैयार नहीं है। हाल में ही जब चीन ने पाकिस्तान की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें पाकिस्तान ने भारत पर ओबीओआर को नुकसान पहुंचाने के लिए भारत की साजिश की बात कही थी। दूसरी ओर अमेरिका की अफगान नीति से उसे बाहर किया जा चुका है तथा वह पाकिस्तान से सहयोग में भी लगातार कटौती कर रहा है। पाक को आतंकवाद का गढ़ कहते हुए अफगानिस्तान और बांग्लादेश भी अब पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ चुके हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक से दुनिया ने जानी भारत की क्षमता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दुनिया में जो स्थान बन गया है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैठ को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। इस के साथ ही पहली बड़ी सफलता 28 सितंबर को तब मिली जब पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा के तुरंत बाद तीन अन्य देशों (बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान) ने उसका समर्थन करते हुए सम्मेलन में ना जाने की बात कही। वहीं नेपाल ने सम्मेलन की जगह बदलने का प्रस्ताव दिया और पाकिस्तान के आंतकवाद के कारण सार्क सम्मेलन न हो सका। इसके अलावा चीन ने भी पाक के द्वारा कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग पर इसे द्विपक्षीय मामला कहकर कन्नी काट ली।

सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए बढ़ाया भारत का समर्थन
2014-15 में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों की यात्राएं कीं। कई लोगों ने इन यात्राओं पर तंज भी कसे और कुछ ने तो उन्हें ‘एनआरआई प्रधानमंत्री’ तक कह डाला, लेकिन इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नुख्ताचीनी पर बिना ध्यान दिये अपनी यात्रा को व्यापक बना रहे थे। इन यात्राओं में वे तीन प्रमुख एजेंडों के साथ आगे बढ़ रहे थे। अलग-अलग देशों के साथ संबंधों में सुधार, निवेश आमंत्रित करने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की स्थायी सीट के लिए समर्थन जीतना उनका प्रमुख उद्देश्य था। दरअसल भारतीय इतिहास में कोई और प्रधानमंत्री नहीं जिन्होंने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए इतनी मेहनत की है। अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस और जापान जैसे देशों के राजदूत और नेताओं को भारत के पक्ष में लाकर उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए लगभग सभी देशों का समर्थन हासिल कर लिया। यह समर्थन इस अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थिति के लिए भारत की पात्रता दिखाने के उनके प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम था।

जलवायु परिवर्तन पर भारत के रुख का दुनिया ने माना लोहा
जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जहां विश्व के देश अपने वैश्विक हितों को छोड़ अपने हितों को देख रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी ने इस पर पहल की। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर विश्व में आस जगाई कि वे इस मामले में नेतृत्व कर सकते हैं। पीएम मोदी की इस पहल ने न सिर्फ दुनिया में भारत की साख मजबूत की बल्कि संसार को पर्यावरण के मामले में एक पॉजिटिव सोच भी दी। दरअसल पीएम मोदी की इस पहल से दुनिया इसलिए चकित रह गई क्योंकि भारत एक विकासशील देश है और प्रदूषण के पैमाने पर भारत का रिकॉर्ड बेहतर नहीं है। लेकिन भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक से बढ़कर एक बदलाव किए हैं। ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2016 और 2017 को समाप्त हुए दो वित्तीय वर्षों में कोयला खपत में 2.2 प्रतिशत की औसत वृद्धि हुई है। जबकि इससे पहले 10 वर्षों में 6 प्रतिशत से अधिक की औसत वृद्धि हुई थी।

NSG की सदस्यता के लिए भी बढ़ाया भारत का समर्थन
भारत को एनएसजी (न्यूक्लीयर सप्लायर ग्रुप) की सदस्यता मिलेगी या नहीं इस पर देश ही नहीं पूरी दुनिया की नजर है। यदि भारत को सदस्यता मिलती है तो हम उस एलीट न्यूक्लीयर ग्रुप में शामिल हो जाएंगे जिसमें फिलहाल दुनिया के केवल 48 देश हैं। भारत का एनएसजी में शामिल होना कितना जरूरी है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस देश में जा रहे हैं वहां एनएसजी की सदस्यता के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। अगर भारत को एनएसजी की सदस्यता मिल जाती है तो सबसे बड़ा फायदा उसे ये होगा कि उसका रुतबा बढ़ जाएगा। दरअसल भारत ये चाहता है कि उसे एक परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाए। हालांकि चीन भारत की एंट्री का विरोध कर रहा है, लेकिन दुनिया के अधिकतर देश भारत के साथ हैं।

पहले भी कई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी शिक्षाविद् और अर्थशास्त्री  प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नीतियों की तारीफ कर चुके हैं। अमेरिका, जर्मनी, इंग्लैंड, फ्रांस, जापान, चीन और इजरायल समेत तमाम देशों के राष्ट्राध्यक्ष समय-समय पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते रहे हैं। विदेशी अर्थशास्त्रियों और राष्ट्राध्यक्षों की नजर में कैसे हैं प्रधानमंत्री मोदी और उनकी नीतियां, एक नजर डालते हैं।

अमेरिकी प्रोफेसर ने की PM मोदी की तारीफ, कहा पहली बार भारत में ईमानदार और जनता को समर्पित सरकार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्य करने की शैली ही ऐसी है कि हर कोई उनकी तारीफ करता है। हाल ही में अमेरिका के एक प्रोफेसर ने प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की तारीफ के पुल बांधे हैं। इस प्रोफेसर का कहना है कि पहली भारत में कोई ऐसी सरकार बनी है, जो भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं हैं और गंभीरता के साथ देश के लोगों की भलाई के लिए कार्य कर रही है।

जाहिर है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब से सत्ता संभाली है वो भारत को निरंतर नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्री स्तर पर भी पीएम मोदी की लोकप्रियता का कोई सानी नहीं है। आज पूरी दुनिया में जितनी धमक भारत की है, पहले कभी नहीं रही। मोदी सरकार की नीति भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की है और इस नीति ने भ्रष्टारियों की रातों की नींद उड़ा दी है। यही वजह है कि पीएम मोदी के विरोधी उन्हें दिन रात कोसते रहते हैं और सरकार के कामकाज पर उंगली उठाते रहते हैं। लेकिन अमेरिका के एक प्रोफेसर ने जिस तरह से मोदी सरकार की तारीफ की है, उसने विपक्ष के मुंह पर करारा तमाचा मारा है।

अमेरिका के एकाउंट्स के प्रोफेसर ने यूएस के सीएफए एसोसिएशन में प्रधानमंत्री मोदी के बारे में बोलते हुए कहा, “भारत में पहली बार ईमानदार, भ्रष्टाचार विरोधी और जनता के लिए गंभीरता से काम करने वाली सरकार बनी है।” प्रोफेसर ने आगे कहा, “भारत काफी वर्षों से एक नेतृत्व के लिए संघर्ष कर रहा था, और पीएम मोदी के रूप में देश को एक मेहनती, ईमानदार नेता मिला है। उनकी पार्टी और सरकार वास्तव में जनता के लिए काम कर रही है।” इस प्रोफेसर ने ये भी कहा है कि तमाम तरह के राजनीतिक विरोध के बाद भी पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है और एशिया की एक प्रमुख इकोनॉमी बन गई है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति भी हुए प्रधानमंत्री मोदी के मुरीद
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर प्रशंसा की है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि, ‘वह प्रधानमंत्री मोदी के विजन, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से प्रभावित हैं।’ राष्ट्रपति ने कहा कि, ‘हम इस एजेंडे में भारत के साथ हैं, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय सोलर एलायंस को लेकर।’ इंडिया टुडे पत्रिका के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि, ‘मेरे विचार में आजादी और व्यक्तिगत दर्शन के साथ पीएम मोदी बहुत बुद्धिमान व्यक्ति हैं। वह भारत की संप्रभुता के साथ बहुत घनिष्ठ हैं, जैसा मैं अपने देश की संप्रभुता के साथ हूं।’

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने भी की प्रशंसा
इसके पहले फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने प्रशंसा करते हुए कहा था कि, ”मैं प्रधानमंत्री मोदी के दृढ़निश्चय और कूटनीतिक सूझबूझ का कायल हूं। पीएम नरेंद्र मोदी ने क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस में अहम भूमिका निभाई और दुनिया को नई राह दिखाई।”

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ
निक्की हेली से पहले दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई मौकों पर प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ कर चुके हैं। पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद यात्रा की थी। इस दौरान दोनों नेताओं में मुलाकात हुई और फिर दोनों ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी का अपना सच्चा मित्र बताते हुए कहा कि आतंकवाद को खत्म करने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने अफगानिस्तान में भारत के सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।

पिछले वर्ष नवंबर में भी अमेरिकी राष्ट्रपपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने विदेश दौरे के दौरान कहा कि पीएम मोदी ने लोगों को एक साथ लाने की दिशा में काम किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने शानदार ग्रोथ हासिल की है, और वो देश की प्रगति के लिए बहुत ही सफलतापूर्वक काम कर रहे हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत ने खुली अर्थव्यवस्था को आत्मसात किया है तब से इसने शानदार ग्रोथ प्राप्त की है और नए- नए अवसर पैदा किए हैं।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा भी मान चुके हैं पीएम मोदी का लोहा
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ पीएम मोदी के मजबूत संबंध जगजाहिर हैं। 2015 में गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था। भारत आने से पहले ओबामा ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी, उन्होंने चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर का जिक्र करते हुए कहा था कि यह भारतीयों की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। श्री ओबामा ने कहा था कि पीएम मोदी का विजन एकदम साफ है और उनकी ऊर्जा प्रभावित करने वाली है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी विकास के रास्ते में रोड़े अटकाने वाले मुद्दों को फौरन हटाने को तैयार हो जाते हैं। पिछले साल दिसंबर में जब पूर्व अमेरिका राष्ट्रपति ओबामा ने भारत का दौर किया था, तभी उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए, उन्हें कड़े फैसले लेने वाला नेता बताया था। बराक ओबामा ने कहा कि मोदी के पास देश के लिए विजन है।

प्रधानमंत्री मोदी महान देशभक्त हैं: नेतन्याहू
हाल ही में भारत के 6 दिवसीय दौरे पर आए इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच और कार्यशैली के कायल हो गए। नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी पूरी तरह से भारत के विकास के लिए समर्पित हैं। उन्होंने पीएम मोदी को महान देशभक्त बताया और कहा कि पीएम मोदी वही करते हैं, जो भारत के लिए अच्छा होता है। इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम मोदी को क्रांतिकारी नेता बताया और कहा कि उनका विजन बहुत स्पष्ट है। प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी के इजरायल दौरे से हमारी दोस्ती शुरू हुई थी, हमारी दोस्ती दोनों देशों में शांति लाएगी, मेरी यह यात्रा शांति, समृद्धि और विकास के लिए है, शांति और खुशहाली के लिए यह साझेदारी अहम है।

जापानी पीएम शिंजो आबे ने की पीएम मोदी की प्रशंसा
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे पीएम मोदी के अच्छे दोस्तों में शामिल हैं। पीएम शिंजो आबे भी कई मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं। पिछले वर्ष सितंबर में शिंजो आबे ने जब भारत का दौरा किया था, तब अहमदाबाद में पीएम मोदी ने उनके साथ रोड शो किया था। इस मौके पर दोनों नेताओं ने अहमदाबाद-मुंबई के बीच चलने वाली बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने पीएम मोदी की प्रगतिशील सोच की तारीफ करते हुए है कि अब दोनों देशों का सहयोग सिर्फ द्विपक्षीय नहीं रहा है, बल्कि यह सामरिक और वैश्विक साझेदारी में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वतंत्रता, लोकतंत्र, मानव अधिकार और कानून का नियम जैसे बुनियादी मूल्यों को साझा करते हैं। उस वक्त आबे ने अपने भाषण में जय इंडिया, जय जापान का नारा भी दिया।

भारत को तरक्की के रास्ते पर ले जा रहे हैं पीएम मोदी: ऑस्ट्रेलियाई पीएम
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना कर चुके हैं। पिछले वर्ष अप्रैल में जब टर्नबुल भारत के चार दिवसीय दौरे पर आए थे, तब उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत तरक्की और विकास के असाधारण रास्ते पर बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलियाई पीएम मैल्कम टर्नबुल ने कहा कि हमारा भारत के साथ मजबूत रिश्ता है और इसे और मजबूत करना है। हम इतिहास और मूल्यों के द्वारा एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने कहा था कि दोनों देश तरक्की और विकास के रास्ते की यात्रा पर आगे चल रहे हैं। आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की उपलब्ध‍ियों की पूरी दुनिया में सराहना हो रही है, ऐसे में हम भारत के साथ रिश्तों को और गहरा करना चाहते हैं।

जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने आतंकवाद से लड़ने में मोदी की तारीफ की
पिछले वर्ष मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी की यात्रा की थी। इस मौके पर दोनों देशों के बीच तमाम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। जर्मनी की चांसलर एंजला मर्केल ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में बताया की उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से आतंकवाद और जलवायु के मुद्दे पर चर्चा की, और इन अहम मुद्दों पर पीएम मोदी के विचारों से काफी प्रभावित हुईं हैं। दुनिया के सामने आतंकवाद समेत कई चुनौतियां हैं, इनका सामना करने के लिए मानवतावादी शक्तियों को एकजुट होना होगा। इस अवसर पर पीएम मोदी ने भी कहा कि भारत और जर्मनी एक-दूसरे के लिए बने हैं। जर्मनी की चांसलर ने पीएम मोदी के सम्मान में निजी भोज भी दिया, ब्रैंडनबर्ग जिले में स्थित 18वीं सदी के पैलेस शलॉस मीजेबर्ग के बाग में भोज से पहले दोनों नेता एक साथ टहले और कई मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

चीनी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की तारीफ में पढ़े कसीदे
चीन हमारा पड़ोसी है, और कुछ मुद्दों पर दोनों के बीच विवाद भी है, लेकिन चीन और उसके नेता प्रधानमंत्री मोदी की ताकत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी कई मौके पर पीएम मोदी की प्रशंसा कर चुके हैं और देश ही नहीं बल्कि वैश्विक मसलों पर उनके विचारों से सहमति जता चुके हैं। पीएम मोदी ने 2014 में जब देश की बागडोर संभाली थी, उसी वर्ष सितंबर में चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा हुआ था। उस दौरे में पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत में अहमदाबाद में साबरमती के तट पर स्वागत के विशेष इंतजाम किए थे। पिछले वर्ष जुलाई में जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिक्स देशों की बैठक में चीनी राष्ट्रपति ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के मजबूत संकल्प को सराहनीय बताया। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख और ब्रिक्स देशों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की सराहना भी की।

फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री भी हुए मुरीद
हाल ही में फिलिस्तीन के प्रधानमंत्री डॉ. रामी हमदल्लाह ने कहा कि ”प्रधानमंत्री मोदी वैश्विक नेता हैं, वे पश्चिम एशिया के नेताओं के बीच अपने अच्छे रसूख के बल पर इजरायल के साथ हमारा विवाद खत्म करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।”

नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने की प्रशंसा
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने प्रशंसा करते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ग्लोबल इकोनॉमिक पॉवर बन चुका है, हम भारत के साथ कई क्षेत्रों में सहयोग के लिए उत्सुक हैं।”

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने की सराहना
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने पीएम मोदी की सराहना करते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक अच्छे वक्ता और कुशल राजनैतिक व्यक्ति हैं। उनके अफगानिस्तान दौरे के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते और मजबूत हुए हैं। भारत और अफगानिस्तान स्वाभाविक मित्र हैं अफगानिस्तान के विकास के लिए भारत ने अहम योगदान दिया है।”

भूटान के प्रधानमंत्री ने की पीएम मोदी की प्रशंसा
भूटान के प्रधानमंत्री श्री श्रिंग टॉग्बे ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री मोदी बहुत ही स्नेहशील व्यक्ति हैं और उनको काफी ज्ञान है और वे भूटान के हितैषी हैं। वे हमारे नरेशों को बहुत आदर की नज़र से देखते हैं। वे भारत-भूटान संबंधों के विवरणों को अच्छी तरह जानते हैं और इसीलिए उद्देश्य एवं आशा की भावना जागती है।”

निक्की हेली ने की पीएम मोदी की तारीफ
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक और प्रशासनिक सुधार कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन भी इसी तरह के सुधारवादी कदम अमेरिका में उठा रहा है। इस तरह के कदमों से दोनों लोकतांत्रिक देशों को समान मूल्यों के आधार पर मिलकर काम करने में सुविधा होगी। निक्की हेली ने कहा कि अमेरिका और भारत के संबंधों के विकास के लिए खुले आकाश जैसी संभावनाएं हैं, जिसकी कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि दोनों देश और ज्यादा सहयोग के साथ कार्य करें। दोनों नेताओं के बीच बेहतर तालमेल भी है। राष्ट्रपति ट्रंप भारत के साथ संबंधों के विकास की व्यापक संभावनाएं देख रहे हैं और भारत के साथ मिलकर ज्यादा कार्य करना चाहते हैं।

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