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मोदी सरकार में आसमानी ऊंचाई को छूने में लगा है पर्यटन उद्योग

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मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत में पर्यटन उद्योग निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। देश में विदेशी पर्यटकों की निरंतर बढ़ती आवाजाही इस बात का प्रमाण है। उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही अर्सा पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की Travel & Tourism, Competitiveness Report – 2017 में भी इस बात का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने 12 अंकों की लंबी छलांग लगाई है। भारतीय पर्यटन की रैंकिंग साल 2013 में 65वें नंबर पर थी, वहीं साल 2015 में भारत 52वें नंबर पर आ गया और केवल डेढ़ साल के अंतराल पर 12 अंकों की छलांग लगाते हुए 40वें पायदान पर जा पहुंचा। पर्यटकों के आगमन के मामले में जापान के पांच और चीन के दो अंक के मुकाबले भारत को 12 अंकों का फायदा हुआ है, जबकि अमेरिका शून्य से दो अंक नीचे और स्विट्जरलैंड शून्य से चार अंक नीचे रहा है।वर्तमान भारतीय पर्यटन नीतियों में किस प्रकार सभी कोणों से पर्यटन का विकास सुनिश्चित किया गया है, इस बात को इस तथ्य द्वारा समझा जा सकता है कि पर्यटकों की सुरक्षा के मामले में भी भारत 15 स्थान ऊपर आ गया है।

नोटबंदी का नहीं कोई विपरीत प्रभाव

यह रिपोर्ट उन विरोधियों की आलोचनात्मक आशंकाओं को भी निर्मूल साबित कर रही है, जिनका कहना था कि नोटबंदी के कारण भारतीय पर्यटन व्यवसाय औंधे मुंह जमीन पर आ गिरेगा। वस्तुस्थिति इसके ठीक उलट है। आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ जनवरी से मार्च की तिमाही में ही इस साल 28.45 लाख विदेशी सैलानी भारत यात्रा पर आये, जो पिछले साल की तुलना में 25.8 लाख सैलानियों के मुकाबले 13.4 % अधिक है। इसी तरह विदेशी सैलानियों से होने वाली विदेशी मुद्रा से आय में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जैसे इस साल जनवरी से मार्च की तिमाही में पर्यटकों से 46,310 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की आमदनी हुई, जो कि इसी अवधि में पिछले साल के 40,411 करोड़ रुपये से 14.6% अधिक है। यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत आने वाले विदेशी सैलानियों में भी सबसे अधिक संख्या अमेरिकी पर्यटकों की रही है।

इ-वीजा से विदेशी सैलानियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी

इसी क्रम में वीजा ऑन अराइवल (विदेशियों के स्‍वदेश आगमन के बाद उन्‍हें वीजा उपलब्ध कराने) सुविधा और ई-टूरिज्‍म वीजा का प्रारंभ होने से भी भारत आने वाले पर्यटकों को बढ़ावा मिला है। केंद्र सरकार 113 देशों से आने वाले नागरिकों को देश के 16 हवाई अड्डों पर ई-पर्यटक वीजा उपलब्ध करा रही है। ई-वीजा की सुविधा मिलने के बाद से भारत के प्रति विदेशी सैलानियों की रुचि और बढ़ी है और वे बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं। जैसे इस साल जनवरी से मार्च के बीच 4.67 लाख विदेशी सैलानी ई-वीजा पर भारत आये। अब तक ई-टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आने वाले पर्यटकों में लगभग 2700 फीसदी से भी अधिक की बढ़त दर्ज की गई है। ई-पर्यटक वीजा सुविधा का इस्तेमाल करने में सबसे पहला स्थान यूनाइटेड किंगडम (22.80%) का है।

भारत आने वाले पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए 161 देशों के 24 एयरपोर्ट्स और 3 बंदरगाहों पर ई-वीजा की सुविधा मोदी सरकार पर्यटकों को दे रही है। इस ई-वीजा की वैधता की सीमा को भी 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दिया गया है। साथ ही भारत आने वाले पर्यटकों को वेलकम कार्ड देने की भी शुरुआत की जा चुकी है, जिससे सैलानियों को सभी महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही स्थान पर मिल जाएं और उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

साहित्य-संस्कृति और कला का सम्मोहन 

भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में पर्यटन कितना अधिक महत्व रखता है, इस तथ्य से प्रधानमंत्री भली-भांति परिचित हैं, इसीलिए इस विषय में वे व्यक्तिगत रुचि लेते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री ने खुद अपने स्तर पर दुनिया-भर में जाकर भारत के पर्यटन क्षेत्र के प्रति दुनिया के आकर्षण को बढ़ावा दिया है। यह देखना भी अपने-आप में बहुत सुखद है कि उनके इन प्रयासों का असर अब सामने आ रहा है। विविधताओं में भी एकता में सूत्रबद्ध रहना ही तो भारत की आत्‍मा में अंतर्निहित है। यहां जो सौंदर्य कश्मीर में दिखता है, केरल उस से बिल्कुल अलग है। राजस्थान और बंगाल की प्राकृतिक संपदा की कोई तुलना नहीं है। पूरी दुनिया में कहीं और शायद ही यह देखने को मिले कि सभी की रुचियों के अनुकूल पर्यटन एक ही देश में मिल जाए। चाहे प्राकृतिक सौंदर्य हो या नवीनतम तकनीक, संगीत-साहित्य हो या योग-अध्यात्म, भारत के समान अनेकता में एकता कहीं और नहीं।

अास्था का आकर्षण

देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित किये जाने वाले वार्षिक साहित्‍योत्‍सव देश की कला और साहित्‍य की समृद्ध परम्‍परा की स्‍पष्‍ट झांकी प्रस्‍तुत करते हैं। यह अपने-आप में इतने आश्चर्य की बात है कि ये कलाएं उन्हें इतना आकर्षित करती हैं कि वे स्वयं इनसे जुड़ने को लालायित हो जाते हैं। यही कारण है कि भारत में ऐसे विदेशियों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जो कोई न कोई भारतीय कला सीख रहे हैं। यहां के भांति-भांति के पकवान अपना एक अलग ही आकर्षण रखते हैं। ये सभी पर्यटकों के लिए भारत को एक बेमिसाल जगह बना देते हैं, जिसे वे जीवन-भर भूल नहीं पाते और भारत यात्रा को दोहराना चाहते हैं। भारत की अतुल्यता और अध्यात्म हमेशा से विश्व के लिए उत्सुकता का विषय रहा है, इसीलिए सरकार आध्‍यात्मिक पर्यटन और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष रूप से ध्‍यान दे रही है। कई ऐसी योजनाएं भी इस समय प्रगतिशील हैं, जो भारत के आध्यात्मिक महत्त्व को केंद्र में रख बनाई गई हैं। हमारी पूज्य नदी गंगा केवल भारतीयों की आस्था का प्रतीक-भर नहीं है। इसका प्रभाव विदेशियों तक पर समान है, इसलिए अध्यात्म भारत का एक बहुत बड़ा आकर्षण है। इससे भी पर्यटन क्षेत्र की क्षमता का और अधिक उपयोग हो सकेगा। चाहे गंगा के घाट हों या लद्दाख के बौद्ध स्थल, इनका आकर्षण कभी कम नहीं हुआ, न देश में, न विदेश में।

स्वदेश दर्शन के द्वारा प्रोत्साहन

विदेशी पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अनेक योजनाओं को प्रारंभ करने के अतिरिक्त देशी पर्यटन को प्रोत्साहित करने और लोगों में अपनी विरासत के प्रति जागरुकता देने की दिशा में भी कई प्रयास किये गए हैं। इसके लिए सरकार ने ‘स्‍वदेश दर्शन’ नाम की योजना शुरू की है। केंद्र सरकार स्वदेश दर्शन की थीम पर टूरिस्ट सर्किट का विकास कर रही है। इसके तहत 13 सर्किट की पहचान की गई है- पूर्वोत्तर भारत सर्किट, बौद्ध सर्किट, हिमालयन सर्किट, तटीय सर्किट, कृष्णा सर्किट, मरुस्थल सर्किट, जन-जातीय सर्किट, इको सर्किट, वन्यजीव सर्किट, ग्रामीण सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, रामायण सर्किट, और विरासत सर्किट। 31 दिसंबर 2016 से पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना के तहत 2601.76 करोड़ रुपये की लागत वाली सभी 31 परियोजनाओं पर काम प्रारम्भ कर दिया है और 506.47 करोड़ रुपये का काम भी पूरा हो चुका है।

भारत में पारंपरिक पर्यटन क्षेत्रों के अतिरिक्त कई अन्य आकर्षण भी हैं, जिनमें विशिष्ट क्षेत्र हैं— क्रूज, चिकित्सा, निरोगता(Wellness),गोल्फ, पोलो, प्रदर्शनी, इको पर्यटन, फिल्म पर्यटन और सतत पर्यटन। प्रतिवर्ष चिकित्सा कारणों से भारत आने वाले पर्यटकों की भी बड़ी संख्या है।

पर्यटन का रोजगार और जीडीपी में योगदान

पर्यटन उद्योग, राष्ट्रीय लेखा प्रणाली में एक उद्योग के रूप में उस प्रकार परिभाषित नहीं है जिस रूप में बाकी उद्योग परिभाषित हैं। इसीलिए पर्यटन उद्योग के जीडीपी में योगदान के मूल्यांकन के लिए पयर्टन सैटेलाइट एकाउंट(टीएसएआई) के तरीके को अपनाया जाता है। इसके आकलन के अनुसार जीडीपी और रोजगार में पर्यटन उद्योग की हिस्सेदारी अच्छी खासी है।

स्वच्छता और नई टेक्नोलॉजी से मिलेगी गति

सदियों से विदेशियों की दृष्टि में भारत की छवि एक गंदे स्थान के रूप में रही है। मोदी सरकार ने इस कड़वी सच्चाई की कभी अनदेखी नहीं की। उसने जहां एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने वाली बड़ी नीतियां बनाई तो दूसरी तरफ देश में स्वच्छता संबंधी योजनाओं के द्वारा जागरुकता का माहौल भी बनाया। सुखद यह है कि इन योजनाओं को भारी जन समर्थन और सफलता मिली। स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छता ही सेवा जैसे अनेक उदाहरण अपनी पूर्ण सफलता के साथ हमारे सामने हैं। इनके साथ नई तकनीक के समन्वय ने इसे और गति दी है। ये सफलताएं इस बात का विश्वास दिलाती हैं कि भारतीय पर्यटन उद्योग मोदी सरकार में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

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