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मुसलमानों में ‘डर’ पैदा कर वोट बटोरने की कवायद या देश तोड़ने की राजनीतिक साजिश!

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एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र के बीड़ में कहा ”सभी मुसलमान चुनाव के समय केवल अपने यानि मुस्लिम उम्मीदवारों को ही वोट दें।” ओवैसी के इस बयान को सीधे अर्थों में समझें तो साफ है कि वे देश को धर्म के आधार पर तोड़ने की बात कर रहे हैं। मुस्लिमों में हिंदुओं का ‘खौफ’ पैदा कर देश को अलगाववाद की तरफ धकेलने की एक साजिश है।
दरअसल कई राजनीति दल एक दूसरे के विरुद्ध ‘डर’ दिखाकर बहुसंख्यक समाज में फूट डालने का काम कर रहे हैं वहीं मुसलमानों को एकजुट होकर देश के शासन पर कब्जा करने के लिए एक साजिश रच रहे हैं।

जिन्ना की राह पर चल रहे असदुद्दीन ओवैसी
ओवैसी एंड कंपनी देश में नफरत की सियासत के वे मोहरे हैं जो भारत के एक और टुकड़े करने के ख्वाब देखते हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने 2014 में कहा था कि आतंकवादी याकूब मेमन को मुस्लिम होने के कारण फांसी दी गई। ओवैसी ने हैदराबाद में पकड़े गए चार आईएस के आतंकी की कानूनी मदद का एलान किया था। ओवैसी ने ही कहा है कि मैं कभी भारत माता की जय नहीं कहूंगा। इसी ओवैसी के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ने दिसंबर, 2012 में कहा था, “अगर भारत से पुलिस को हटा लिया जाये तो 15 मिनट के अंदर यहां के 25 करोड़ मुसलमान 100 करोड़ हिंदुओं का खात्माब कर सकते हैं।” यानि हिंदुओं से नफरत की बात कर मुसलमानों में ‘डर’ पैदा करो और अपनी राजनीतिक रोटी सेंको।

राम मंदिर मुद्दे पर मुसलमानों में ‘डर’ पैदा कर रही कांग्रेस
25 जून को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा, ”संत समाज कुछ दिन धैर्य रखें, अयोध्या में राम मंदिर अवश्य बनेगा, लेकिन मर्यादा में रहकर ही मर्यादा पुरुषोत्तम का मंदिर बनेगा।” जाहिर है उनका यह बयान संत समाज को आश्वासन देने के लिए है। दरअसल राम जन्मभूमि का मामला अदालत में है और वह सुनवाई के अंतिम चरण में है। साफ है कि योगी आदित्यनाथ का यह कहना तर्कसंगत है, क्योंकि सितंबर-अक्टूबर तक इस मामले का निर्णय आने की संभावना है। हालांकि राम मंदिर के मसले पर कांग्रेस ‘डर’ की राजनीति कर रही है। कांग्रेस के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की थी कि राम मंदिर-बाबरी ढांचे मुकदमे का कोई भी निर्णय 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद ही आए। जाहिर है वह मुसलमानों में ‘डर’ पैदा कर साबित करना चाहते हैं कि वे ही मुसलमानों के हितैषी हैं।

AMU में आरक्षण की मांग पर डर पैदा करने की कोशिश
अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और देश के तमाम ऐसे संस्थान जिन्हें अल्पसंख्यक मुस्लिम वर्ग के लोग संचालित करते हैं। हालांकि यहां दलितों को कोई आरक्षण नहीं दिया जाता। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने AMU और उन सभी संस्थानों में दलितों के लिए नौकरी और दाखिले में आरक्षण की मांग की है जिन्हें मुस्लिम लोग संचालित करते हैं। उन्होंने कहा, ”BHU और बाकी हर जगह दलितों को आरक्षण मिलता है तो AMU और जामिया जैसे विश्वविद्यालयों में भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।” जाहिर है यह एक मांग की गई है, लेकिन सवाल यह है कि कि दलित-मुस्लिम एकता की बात करने वाली कांग्रेस पार्टी, दलित चिंतक और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता दलितों के लिए आरक्षण की मांग करते हैं या नहीं। या फिर इस गंभीर मुद्दे को भी हिंदुओं का ‘डर’ बताकर राजनीतिक रोटी सेंकी जाएगी।

कांग्रेस ने की ‘डर’ की राजनीति

  • नवंबर, 2015: मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान में कहा, ”इनको (बीजेपी सरकार) हटाइए, हमें ले आइए और कोई रास्ता नहीं है।”
  • मई, 2018 : कर्नाटक में गुलाम नबी आजाद ने कहा, “भाजपा को रोकने के लिए मुसलमानों को बड़ी तादाद में कांग्रेस को वोट देना चाहिए।”
  • जून, 2018 : कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ‘’कश्मीर में सेना चार आतंकियों के साथ 20 नागरिकों को मारती है।‘’
  • जून, 2018 : कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘’जितने भी हिन्दू धर्म वाले आतंकवादी पकड़े गए हैं, सब संघ के कार्यकर्ता रहे हैं।‘’

मुसलमानों को हिंदुओं से खतरा बताती है कांग्रेस
उत्तर प्रदेश के दादरी में गोमांस रखने के आरोप में भीड़ ने अखलाक की हत्या कर दी। मामला कानून व्यवस्था का था… तत्कालीन प्रदेश सरकार के मुखिया अखिलेश यादव से जुड़ा था। लेकिन इस एक घटना के लिए देश की सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया गया। कांग्रेस की अगुआई में 2015 में अवार्ड वापसी का अभियान चलाया गया, लेकिन कुछ राज्यों में चुनाव के बाद यह मुद्दा शांत पड़ गया। जाहिर है यह सब मुसलमानों में मोदी के प्रति नफरत और ‘डर’ पैदा करने की नीति के तहत ही की गई थी ताकि मुसलमानों के एकमुश्त वोट उन्हें मिल जाएं।

मुसलमानों में ‘डर’ पैदा करने की कोशिश करती है सपा
आरजडी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी जैसे राजनीतिक संगठन भी मुसलमानों में ‘भय’ पैदा कर अपनी राजनीति चमकाती रही हैं। मुलायम सिंह का वह बयान आज भी लोगों को याद है जिनमें वे कहते हैं, ‘’देश की एकता के लिए 16 की जगह 30 जानें भी जातीं, तो भी पीछे नहीं हटते।‘’ दरअसल यह बयान भी मुसलमानों में ‘डर’ पैदा करने के लिए दिया गया कि आप समाजवादी पार्टी को वोट देंगे तभी आप सुरक्षित रह पाएंगे।

मीडिया का एक धड़ा भी मुस्लिमों में पैदा करता है ‘डर’
हिन्दू लड़की को चौदह मुसलमान लड़कों  द्वारा छेड़े जाने पर चुप्पी। प्रशांत पुजारी को सरेआम काट दिए जाने पर खामोशी। डॉक्टर नारंग को घर से खींचकर मार देने पर भी मौन। दिल्ली में हिन्दू ई-रिक्शाचालक को मुसलमानों द्वारा मारे जाने पर भी शांति। कासगंज में चंदन को सरेआम मार दिए जाने पर भी खामोशी। हालांकि अखलाक और जुनैद की भीड़ द्वारा हत्या पर देश की मीडिया का एक धड़ा मुसलमानों में ‘डर’ पैदा करता है। वह देश को असहिष्णु तक बताता है और भारत को बदनाम करता है।

केवल भाजपा ही करती है ‘सबका साथ-सबका विकास’ की बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ऐसी दिशा में बढ़ रहा है जहां उनकी नीति है- नहीं किसी का तुष्टिकरण-सबका हो सशक्तीकरण! पीएम मोदी ने बीते चार वर्षों के कार्यकाल  में जितनी भी योजनाएं जमीन पर उतारी हैं, उनमें जाति-धर्म-भाषा और क्षेत्र के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया है। वे हर वक्त सवा सौ करोड़ देशवासियों की बात करते हैं न कि हिंदू-मुसलमान-ईसाई या सिख की। वे सबका साथ-सबका विकास की बात करते हैं न कि किसी के साथ भेदभाव की।

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