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मन के हारे हार है: मतगणना के पहले ही हार चुकी थी कांग्रेस, जानिए हार की 10 बड़ी वजहें

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गुरुवार की सुबह आठ बजे से शुरू हुई मतगणना दिन चढ़ने के साथ जैसे-जैसे आगे बढ़ती रही, बीजेपी की सीटों की संख्या भी ऐतिहासिक रूप से परवान चढ़ती गई। बीजेपी ने अकेले दम न सिर्फ बहुमत का आंकड़ा पार किया, बल्कि ‘अबकी बार 300 पार’ के नारे को भी साकार कर दिया। दूसरी ओर, कांग्रेस की एक बार फिर ऐतिहासिक पराजय हुई। हार की वजहों पर कांग्रेस तो मंथन करेगी ही, लेकिन सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस ने चुनावों के दौरान ही हार मान ली थी। तभी, उसके नेता जनता के सामने विकास का रोडमैप रखने की बजाए पीएम मोदी के लिए अभद्र टिप्पणियां करते रहे। नकारात्मकता के कंधे पर चढ़ चुनाव प्रचार में जुटी कांग्रेस की कैसे हुई हार, जानिए 10 बड़ी वजहें।   

कांग्रेस करती रही गाली-गलौज

पीएम मोदी ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान अपनी सरकार की उपलब्धियों और विकास-कार्यों को जनता के सामने रखा, लेकिन कांग्रेस का रवैया बेहद नकारात्मक रहा। कांग्रेस के नेता पीएम मोदी को गाली देने में व्यस्त रहे।

‘जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर’

किसी कवि ने कहा है- पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर, जाति-जाति का शोर केवल कायर क्रूर। इस चुनाव में कांग्रेस और महागठबंधन के दलों ने विकास की राजनीति को जातिवाद की राजनीति से हराने की कोशिश की, लेकिन जनता ने विकास का विकल्प चुना। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल से लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती तक ने पीएम मोदी की जाति पर सवाल उठाया।  

महंगा पड़ा ‘चौकीदार चोर है’ का नारा

जब पूरा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ‘मैं भी चौकीदार’ कह रहा था, तब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का ‘चौकीदार चोर है’ का नारा न सिर्फ फ्लॉप रहा, बल्कि राजनीतिक तौर पर कांग्रेस के लिए महंगा भी साबित हुआ।

सेना के पराक्रम का सबूत मांगने का दुस्साहस किया  

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस तरह से एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को ध्वस्त किया, वह अभूतपूर्व था। लेकिन, कांग्रेस के नेताओं ने एक बार फिर वही गलती दोहराई, जो उन्होंने उरी हमले के बाद हुए सर्जिकल स्ट्राइक के समय की थी। एक बार फिर कांग्रेस के नेता एयर स्ट्राइक का सबूत मांगने लगे।

राफेल को ‘बोफोर्स’ बनाने की नाकाम कोशिश

एक अरसे से राहुल गांधी राफेल डील को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन राफेल को बोफोर्स साबित करने की उनकी कोशिश नाकाम साबित हुई।

कांग्रेस के ‘न्याय’ ने दिलाई दशकों के अन्याय की याद

सात दशकों से देश की गरीबी दूर करने के वादे करने वाली कांग्रेस ने जब एक फिर गरीबों के लिए ‘न्याय’ योजना का वादा किया तो किसी को इस वादे पर भरोसा नहीं हुआ। इसके उलट जनता में इसे लेकर कांग्रेस के प्रति नाराजगी पैदा हुई। राहुल ने सालाना 72,000 रुपये देने का वादा तो कर दिया, लेकिन ये नहीं बताया कि ये पैसे कहां से आएंगे। जाहिर है, कांग्रेस का यह शिगूफा औंधे मुंह गिरा।

चेहरे पर चेहरा: पीएम पद के लिए कोई सर्वसम्मत चेहरा नहीं 

कांग्रेस और महागठबंधन में पीएम पद के प्रत्याशी के लिए कोई आम राय नहीं बन पाई। राहुल गांधी और मायावती से लेकर ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू तक कई नेता पीएम की कुर्सी के लिए लॉबिंग करते नजर आए। दूसरी ओर, एनडीए में पीएम मोदी के चेहरे को लेकर एक स्पष्टता थी। विपक्ष के पास देश के विकास का कोई रोडमैप भी नहीं दिखा।  

किसानों की ऋणमाफी: वादे हैं वादों का क्या

पंजाब, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में कांग्रेस ने किसानों से कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन किसी भी राज्य में इसे ठीक ढंग से लागू नहीं किया गया। मध्य प्रदेश में तो किसानों को 5 रुपये से लेकर 13 रुपये तक के चेक दिए गए।   

हारने से पहले ही ईवीएम पर ठीकरा फोड़ा

चार चरणों के मतदान के बाद से ही कांग्रेस और महागठबंधन के नेताओं ने ईवीएम को लेकर सवाल उठाना शुरू कर दिया। यह सिलसिला एग्जिट पोल के सामने आने तक भी चला। 21 पार्टियों के नेता चुनाव आयोग को ही कठघरे में खड़ा करते रहे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने मतदान प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के रवैये को उचित ठहराया।

कांग्रेस ‘वोटकटवा’ पार्टी- प्रियंका

पूर्वांचल में कांग्रेस को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालने वाली प्रियंका वाड्रा ने यह कहकर कांग्रेस की खस्ताहालत को जगजाहिर कर दिया कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन से अलग लड़कर कांग्रेस, बीजेपी का वोट काटने का काम कर रही है। यानि, यूपी में कांग्रेस जीतने के लिए नहीं बल्कि वोट काटने के लिए लड़ रही थी।

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