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शेल कंपनियों पर मोदी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 55 हजार निदेशकों के नाम सार्वजनिक

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भ्रष्टाचार और कालेधन पर प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के सख्त तेवर से कारण मुखौटा कंपनियों पर करारा प्रहार किया जा रहा है। दरअसल मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार की इस संस्कृति को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प को सिद्धि में बदलने की गति भी तेज कर दी गई है और भ्रष्टाचारियों को एक-एक करके शिकंजे में लिया जा रहा है।

फर्जी कंपनियां के लिए चित्र परिणाम

मोदी सरकार ने शेल कंपनियों पर कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए इनसे जुड़े 55 हजार से अधिक डायरेक्टर्स के नाम सार्वजनिक कर दिए हैं। सरकार ने यह कदम इन कंपनियों के परिचालन को रोकने और इनसे जुड़े डायरेक्टर्स के भविष्य में इस तरह की किसी अन्य गतिविधि में शामिल से रोकने के लिए उठाए हैं। ये नाम इसलिए भी सार्वजनिक किए गए हैं जिससे यह किसी और कंपनियों में प्रमुख पदों पर काम न कर सकें।

तीन लाख फर्जी कंपनियां के लिए चित्र परिणाम

और भी नाम किए जाएंगे सार्वजनिक
दरअसल केंद्र सरकार ने एक लाख से ज्‍यादा ऐसे डायरेक्‍टरों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की हे जो शेल (मुखौटा) कंपनियों से जुड़े हुए हैं। इन कंपनियों ने पिछले तीन साल से एनुअल रिटर्न नहीं जमा किया है। इसी के मद्देनजर सरकार ने साफ किया है कि अभी और भी नामों को सार्वजनिक किया जाएगा।

मुखौटा कंपनियों पर सरकार ने तेज की कार्रवाई, 55 हजार से अधिक निदेशकों के नाम किए सार्वजनिक

रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज ने जारी किए नाम
देश के विभिन्‍न आरओसी (रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज) ने इस संबंध में नोटिस निकालना शुरू कर दिया है। चेन्‍नई ने ऐसे 24 हजार डायरेक्‍टरों के नाम सार्वजनिक किए हैं, वहीं अहमदाबाद और अर्नाकुलम के 12-12 हजार नामों को आरओसी ने सार्वजनिक किया है।

प्रधानमंत्री फर्जी कंपनी के लिए चित्र परिणाम

1.06 लाख डायरेक्टर्स की हुई पहचान
अब तक 1.06 लाख डायरेक्टर्स की पहचान की जा चुकी है, जिनकी शेल कंपनियों ने या तो अब तक अपने कारोबार की शुरुआत नहीं की है या लगातार 3 साल तक वार्षिक रिटर्न दाखिल करने में असफल रही है। देश में करीब 11 लाख कंपनियां रजिस्‍टर्ड हैं, जिनमें से सरकार ने 2.09 कंपनियों को शेल कंपनियां मानते हुए प्रतिबंध लगा दिया है यानि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर चुकी है।

फर्जी कंपनियां के लिए चित्र परिणाम

कंपनियों के खातों पर लगी रोक
इनके अलावा सरकार ने बैंकों से भी कहा है कि वे इन कंपनियों के खातों का उनके डायरेक्टर या अधिकृत प्रतिनिधि द्वारा परिचालन करने पर रोक लगाएं। इसके अलावा इन कंपनियों की आड़ में की गई मनी लॉन्ड्रिंग एक्टिविटीज की भी जांच की जा रही है। डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों से जुड़े चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी और कॉस्ट अकाउंटेंट जैसे प्रफेशनल्स की भी पहचान की गई है।

शेल कंपनियों पर सरकार की सख्‍ती

कईयों के नाम पॉलिटिकल कनेक्शन !
आरओसी से जारी लिस्‍ट में कई नाम पॉलिटिकल और कार्पोरेट ग्रुप से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि इनकी तत्‍काल में पहचान नहीं हो सकी है। इस जार लिस्‍ट में डायरेक्‍टर के नाम के अलावा उनका डायरेक्‍टर आईडेंटिफिकेशन नम्‍बर (डीआईएन) के अलावा उनका पता दिया गया है। इसके अलावा अन्‍य कोई जानकारी नहीं दी गई है।

फर्जी कंपनियों के खातों पर रोक के लिए चित्र परिणाम

पश्चिम बंगाल में हैं सबसे अधिक कंपनियां
कई ऐसी कंपनियों का पता लगा है जहां एक पते पर ही 400 फर्जी कंपनियां चलाई जा रहीं थी। अगस्त के पहले सप्ताह में ही शेयर बाजार नियामक ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया’ (सेबी) ने ऐसी 331 कंपनियों पर व्यापार प्रतिबंध लगा दिया था, जिन पर फर्जी कंपनियां होने का संदेह था। इनमें कम से कम 145 कंपनियां कोलकाता में रजिस्टर्ड हैं और 127 कंपनियां गंभीर जांच के घेरे में हैं।

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