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पीएम मोदी के विजन से खेल कर खिलता भारत- साल 2018 की बड़ी उपलब्धियां

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वर्ष 2018 में खेल के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां ऐतिहासिक रही हैं। खास बात ये रही है कि जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की खोज एवं उनके पोषण को लेकर अपनाए गए दृष्टिकोण का परिणाम बहुत ही सकारात्मक रहा है। तभी तो भारत ने इस साल गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में 66 पदक, जकार्ता एशियन गेम्स में 69 पदक और पैरा एशियन गेम्स में 72 पदकों के साथ अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का रिकॉर्ड बनाया है।

2018 में खेल के क्षेत्र की उपलब्धियां निम्नलिखित हैं:

खेलो इंडिया स्कूल गेम्स
पहला खेलो इंडिया स्कूल गेम्स, 2018 का आयोजन 31 जनवरी 2018 से 8 फरवरी, 2018 के बीच किया गया। इसमें 29 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों के 3,507 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इसमें 199 खिलाड़ियों को गोल्ड, 199 खिलाड़ियों को रजत और 275 खिलाड़ियों कांस्य पदक मिले। खेलो इंडिया स्कूल गेम्स, 2018 की एक प्रमुख उपलब्धि ये रही कि इसमें 1,178 खेल प्रतिभाओं की पहचान की गई, जिन्हें अगले 8 वर्षों तक 5 लाख रुपये सालाना के खर्च के साथ प्रशिक्षण दिया जाएगा।

राष्ट्रमंडल खेलों में बेहतर प्रदर्शन
इस साल के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रदर्शन 2010 के बाद सबसे अच्छा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 4 से 15 अप्रैल 2018 तक चले राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इसमें भारत को 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य के साथ कुल 66 पदक मिले। राष्ट्रमंडल खेलों में यह भारत की 18वीं भागेदारी थी।

एशियाई खेलों और पैरा एशियाई खेलों में सराहनीय प्रदर्शन
18 अगस्त से लेकर 2 सितंबर, 2018 तक जकार्ता और पालेम्बैंग (इंडोनेशिया) में आयोजित किए गए एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों और टीमों ने बहुत ही सराहनीय प्रदर्शन किया। भारत ने 69 पदक जीते, जिसमें 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत 8 वें स्थान पर रहा। 5 सितंबर, 2018 को एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मानित किया। इससे पहले मंत्रालय ने एक समारोह में पदक विजेताओं को नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए। स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 20 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं को 10 लाख रुपये दिए गए। वहीं एशियाई पैरा गेम्स (एपीजी) में भारत ने 72 मेडल जीते, जिसमें 15 स्वर्ण, 24 रजत और 33 कांस्य पदक शामिल हैं। इसकी पदक तालिका में भारत ने 9 वां स्थान हासिल किया, जो कि पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से संख्या के मामले में बहुत आगे था।यूथ ओलंपिक गेम्स में अच्छा प्रदर्शन
अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स में हुआ इसबार का युवा ओलंपिक गेम (वाईओजी) भारत के दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। इसमें भारत ने 13 पदक जीतकर 14 वां स्थान प्राप्त किया, जिसमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 1 कांस्य पदक शामिल हैं।

एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में सफलता
लाइट फ्लाईवेट श्रेणी के फाइनल में भारत की मैरीकॉम ने यूक्रेन की मुक्केबाज हाना अखोटा को हराकर स्वर्ण पदक जीतकर, एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में छह स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली महिला मुक्केबाज बनने का इतिहास रचा। इस प्रतियोगिता में भारत एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। एआईबीए महिला विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप का आयोजन नई दिल्ली के के डी जादव इंडोर स्टेडियम में 15 से 24 नवंबर, 2018 के दौरान हुआ।

मेधावी खिलाड़ियों का पेंशन बढ़ाया
अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के पेंशन की मौजूदा दर दोगुनी कर दी गई है। नई दरों को न्यूनतम 12,000 रुपया प्रति माह तथा अधिकतम 20,000 रुपया प्रतिमाह रखा गया है। पैरा-ओलंपिक खेलों और पैरा एशियाई खेलों में पदक विजेताओं की पेंशन की दरें क्रमश: ओलंपिक खेलों और एशियाई खेलों में पदक विजेताओं के बराबर होगी। पेंशन की दरों में संशोधन को 1 अप्रैल, 2018 से प्रभावी कर दिया गया है।

नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड में 10 करोड़ रुपये का योगदान
इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ने नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फंड में 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह आईआईएफसीएल द्वारा दिए गए योगदान की तीसरी किस्त है, जिससे उसका कुल योगदान 30 करोड़ रुपया हो गया है। इस योगदान का उपयोग बैडमिंटन, तीरंदाजी और पैरा स्पोर्ट्स जैसे खेलों को बढ़ावा देने के लिए तथा इनके खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, अन्य सेवाएं और इससे जुड़े अकादमियों की स्थापना या उनकी सहायता के लिए किया जा रहा है। इस फंड की स्थापना खेल में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।

राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी (एनएडीए)
इस वर्ष की शुरुआत में ही राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग एजेंसी ने पहले खेलो इंडिया स्कूल गेम्स के दौरान अपने प्रयास की शुरुआत कर दी थी, ताकि खिलाड़ी खेल की अखंडता का पालन करें और खेल की असल भावना को ताकत मिले। स्कूल खेल को डोप से मुक्त करने के लिए एजेंसी द्वारा इस साल कुल 377 डोप परीक्षण का आयोजन किया गया। वहीं साल के मध्य में आयोजित एशियाई खेलों से पहले 498 भारतीय एथलीटों का परीक्षण किया गया, जो कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय खेल से पहले इसके द्वारा आयोजित सबसे बड़ा परीक्षण था। वर्ल्ड एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के द्वारा प्रकाशित वार्षिक आंकड़ों की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एंटी डोपिंग नियमों के उल्लंघन की संख्या में कमी हुई है। डोपिंग के घटनाओं की संख्या में इस प्रकार की कमी से भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे से छठवें स्थान पर पहुंच गया है।

मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय
इसी साल 16 मार्च को प्रधानमंत्री ने मणिपुर की राजधानी इंफाल में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी। वैसे राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय ने खुमानलंपक खेल परिसर, इंफाल में एक अस्थायी परिसर के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। इस विश्वविद्यालय में जहां इसी साल 15 जनवरी से बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स (बीपीईएस) और बीएससी (स्पोर्ट्स कोचिंग) के प्रभावी पाठ्यक्रमों के प्रथम एकैडमिक सेशन की शुरुआत हुई है। राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रबंधन और खेल कोचिंग के क्षेत्र में खेल शिक्षा को बढ़ावा देने वाला अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय होगा। यहां खेल से जुड़े खास विषयों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक विश्व की सर्वश्रेष्ठ खेल प्रथाओं के तहत एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र भी काम करेगा। यह विश्वविद्यालय स्पोर्ट्स कोचिंग, स्पोर्ट्स साइंसेज और शारीरिक शिक्षा के विषयों में बैचलर, मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान करेगा।

प्रथम अंतरराष्ट्रीय खो-खो चैंपियनशिप में भागीदारी को मंजूरी
भारत सरकार ने वित्तीय सहायता के साथ 1 से 4 सितंबर, 2018 को इंग्लैंड में हुए प्रथम अंतरराष्ट्रीय खो-खो चैंपियनशिप के लिए भारत के खो-खो टीम की भागीदारी को मंजूरी दी है। अब तक खो खो जैसे खेलों को “अन्य” विषयों के रूप में वर्गीकृत किया जाता रहा है, जिसे अंतरराष्ट्रीय खेल की स्पर्धा में भागीदारी लेने के लिए वित्तीय सहायता के योग्य नहीं माना जाता था।

राष्ट्रीय खिलाड़ियों को विशेष सहायता
राष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए कल्याण के लिए पंडित दीनदयाल अपध्याय राष्ट्रीय कल्याण कोष (पीडीयूएनडब्लूएफएस) से निम्नलिखित वित्तीय सहायता प्रदान की गई-

*जिमनास्ट कोच एन. बृज किशोर को 6 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी सुमित्राभा के परिवार को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*खैडिम कालंबिया चानू (फैंसिंग) को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*लक्ष्मी कांत दास को 2 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*लिम्बा राम (तीरंदाजी) को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*गोहेला बारो (तीरंदाजी) को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*अशोक सोरेन (तीरंदाजी) को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*गरिमा जोशी (एथलीट) को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*प्रेम लाल, पूर्व पहलवान को 5 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*हकम सिंह, पूर्व एथलीट को 10 लाख रुपये चिकित्सा उपचार के लिए।
*वंदना सूर्यवंशी, पूर्व जूडो खिलाड़ी को 2 लाख रुपये वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए।
*जी. लक्ष्मण, पूर्व एथलीट को 10 लाख रूपये वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए।

खेल में बिजनेस मैनेजमेंट
देश के अंदर खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता का विकास करने के लिए वर्ष 2018-19 में अन्य बिजनेस मैनेजमेंट कोर्स के साथ ही खेल में बिजनेस मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर डिप्लोमा शुरू किया गया है। 2 साल के इस कोर्स की शुरुआत आईआईएम), रोहतक में हुआ है।

नेशनल सेंटर ऑफ स्पोर्ट्स साइंसेज एंड रिसर्च योजना की शुरुआत
इस योजना का उद्देश्य उच्च श्रेणी के एथलीटों के अच्छे प्रदर्शन के लिए उच्च स्तरीय शोध, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देना है। इसके तहत मेडिकल कॉलेजों से खेल चिकित्सा में एमबीबीएस डिग्री दी जाएगी यानि एमडी इन स्पोर्ट्स मेडिसिन और डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स मेडिसिन। जबकि, विश्वविद्यालयों के खेल विज्ञान विभागों द्वारा खेल फिजियोलॉजी में एमएससी, स्पोर्ट्स बायोकेमैस्ट्री, स्पोर्ट्स न्युट्रीशन, स्पोर्ट्स बायोमेकॅनिक्स, खेल प्रशिक्षण के तरीके; खेल में एमपीटी; खेल मनोविज्ञान में एमए और स्पोर्ट्स एंथ्रोपोमेट्री में सर्टिफिकेट जैसे कोर्स करवाए जाएंगे। इन योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में 6 विश्वविद्यालयों और 6 मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों या संस्थानों का चयन किया गया है। चयनित संस्थान निम्नलिखित हैं-

खेल विज्ञान विभाग का वित्त पोषण करने के लिए चुने गए-
(i) गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर
(ii) लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ फीजिकल एजुकेशन,ग्वालियर
(iii) नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ न्युट्रीशन, हैदराबाद
(iv) अन्नामलाई विश्वविद्यालय, तमिलनाडु
(v) राजस्थान केन्द्रिय विश्वविद्यालय, अजमेर, राजस्थान
(vi) कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता, पश्चिम बंगाल।

खेल चिकित्सा विभाग का वित्त पोषण के लिए चुने गए-
(i) किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ
(ii) वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली
(iii) पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक, हरियाणा
(iv) बैंगलोर मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरू, कर्नाटक
(v) केईएम अस्पताल और सेठ जी. एस. मेडिकल कॉलेज, मुंबई
(vi) रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, इम्फाल।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय खेलों में पदक विजेताओं और उनके कोच को नकद पुरस्कार देने की योजना भी शुरू की गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में विजेता खिलाड़ियों को 11.02 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि दी जा चुकी है।

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