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मोदी राज में कर्मचारियों और उनके परिजनों का होगा बेहतर इलाज, ESIC बनेगी सरकारी कंपनी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कर्मचारियों के हितों को सर्वोपरि रखा है। अपने पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश के करोड़ों कर्मचारियों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए कई नीतिगत फैसले लिए, वह सिलसिला दूसरे कार्यकाल में भी जारी है। सरकार ईएसआई मेडिकल स्कीम को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है। इसके तहत कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को कंपनी में बदलने का फैसला किया गया है। वहीं ईएसआईसी ने 2022 तक देश के हर जिले में डिस्पेन्सरी कम ब्रांच कार्यालय खोलने की कवायद तेज कर दी है। इससे बीमित कर्मचारियों का बेहतर इलाज संभव होगा। 

ESIC के ढांचे में होगा बदलाव

सरकार ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) को कंपनी में बदलने के लिये 18 सितंबर, 2019 को एक मसौदा जारी किया। इसमें कर्मचारी राज्य बीमा निगम के ढांचे को बदलने की बात की गयी है। सरकार अब ईएसआईसी के लिए चेयरमैन और वाइस चेयरमैन नियुक्त करेगी। इसके साथ ही इनमें सीईओ भी बनाये जा सकेंगे जो संबंधित निकायों के कार्यकारी प्रमुख होंगे। मसौदे में कहा गया है कि ईएसआईसी को कंपनी का स्वरूप दिया जा सकता है। अभी ये एजेंसी न्यास या बोर्ड द्वारा चलायी जाती हैं और स्वायत्त निकाय के तौर पर काम करती है।

सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 का मसौदा जारी

ईएसआईसी के लिए चेयरमैन, वाइस चेयरमैन और सीईओ की नियुक्ति संघ लोग सेवा आयोग के परामर्श से की जाएगी, जिसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा या अन्य सेवाओं के अधिकारी नियुक्त किए जा सकते हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने इस संबंध में सामाजिक सुरक्षा संहिता 2019 का मसौदा जारी किया है। इस पर संबंधित पक्षों और आम लोगों से 25 अक्टूबर तक राय देने को कहा गया है।

डिस्पेन्सरियों को चरणबद्ध तरीके से खोलने का फैसला

केन्द्रीय श्रम मंत्रालय की मेडिकल बेनिफिट ऑफ काउंसिल की 17 सितंबर, 2019 को बैठक हुई, जिसमें बीमित कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा देने के लिए बीमा डिस्पेन्सरियों को चरणबद्ध तरीके से खोलने का फैसला किया गया। इसके तहत उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां बीमा डिस्पेन्सरियां नहीं हैं और ईएसआईसी मेडिकल स्कीम अभी तक लागू नहीं थी।

कैशलेस इलाज और दवाओं की सुविधा

ईएसआईसी मेडिकल स्कीम का लाभ उन जिलों में भी बीमित कर्मचारियों को भी मिलेगा, जहां पर बीमा डिस्पेन्सरी और अस्पताल नहीं हैं। इन जिलों में निजी डॉक्टर बीमित कर्मचारियों का कैशलेस इलाज करेंगे और निर्धारित मेडिकल स्टोर से उन्हें कैशलेस दवाएं भी दी जाएंगी। कारपोरेशन ने निजी डॉक्टरों से करार का सिलसिला शुरू कर दिया है।

कर्मचारियों और उनके परिजनों को मिलेगा हेल्थ पासबुक

देश के हर बीमित कर्मचारी और उसके परिजनों को हेल्थ पासबुक दी जाएगी, जिससे उन्हें इलाज मिलेगा और उनकी बीमारी का पूरा ब्योरा भी उसी में दर्ज होगा। मेडिकल बेनिफिट ऑफ काउंसिल की बैठक में हेल्थ पासबुक को लांच भी कर दिया गया। साथ ही मेडिकल कमिश्नर की अगुवाई में एक कमेटी बनाने का भी फैसला किया गया। कमेटी बीमा अस्पतालों में आयुष्मान योजना और ईएसआईसी योजना से इलाज की नीति तय करेगी ताकि किसी तरह की कोई दिक्कत बीमित कर्मचारियों को न हो। 

एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के पहले और दूसरे कार्यकाल में अबतक कर्मचारियों की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों पर-

ईएसआई अंशदान 6.5 से घटाकर किया 4 प्रतिशत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी, जब राज्य कर्मचारी बीमा (ईएसआई) स्कीम में अंशदान की दर 6.5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया। इससे 3.6 करोड़ कर्मचारी और 12.85 लाख नियोक्ता लाभान्वित होंगे। अंशदान की घटी हुई दर से कामगारों को बहुत राहत मिलेगी। इससे और अधिक कामगारों को ईएसआई योजना के अंतर्गत नामांकित करना और ज्यादा से ज्यादा श्रमिक बल को औपचारिक क्षेत्र के अंतर्गत लाना सुगम हो सकेगा। अंशदान में नियोक्ता के हिस्से में कमी होने से प्रतिष्ठानों का वित्तीय उत्तरदायित्व घटेगा, जिससे इन प्रतिष्ठानों की व्यावहारिकता में सुधार होगा। इससे कारोबार करने की सुगमता में और भी ज्यादा बढ़ोत्तरी होगी। ऐसी भी संभावना है कि ईएसआई अंशदान की दर में कटौती से कानून के बेहतर अनुपालन का मार्ग प्रशस्त होगा। ईएसआई कानून के अंतर्गत नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही अपना-अपना योगदान देते हैं।

EPFO ने ब्याज दरें बढ़ाकर की 8.65 प्रतिशत 
प्रधानमंत्री मोदी संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को लेकर काफी फिक्रमंद दिखाई दे रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में मोदी सरकार ने भविष्य निधि पर ब्याज दर बढ़ाकर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दर बढ़ाकर 8.65 प्रतिशत कर दिया गया। इस फैसले से EPFO के 6 करोड़ से अधिक अंशधारकों को फायदा मिलेगा।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 3,000 रुपये की मासिक पेंशन
प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिम बजट-2019 में असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (PMSYM) योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। 15 फरवरी, 2019 से इस योजना की शुरूआत हो चुकी है। इस योजना का लाभ लेने के लिए देशभर के 3.13 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इसके तहत 60 साल की उम्र के बाद हर कामगार को 3,000 रुपए महीने पेंशन दी जाएगी। इस योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों को मिलेगा। जिनकी न्यूनतम मासिक आय 15 हजार रुपए या उससे कम तथा आयु सीमा 18-40 वर्ष के बीच है। 

कर मुक्त ग्रेच्युटी सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर हुई 20 लाख
मोदी सरकार ने अंतरिम बजट-2019 में कर्मचारियों को एक और तोहफा दिया। बजट में ग्रेच्युटी सीमा (Gratuity) 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया गया। हालांकि इससे संबंधित विधेयक ‘ग्रेच्युटी का भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2018’ को 29 मार्च 2018 से लागू कर दिया गया था। इसके साथ ही मोदी सरकार निजी क्षेत्र में ग्रेच्युटी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि 5 साल से घटाकर 3 साल कर दिया। यानि अगर किसी कर्मचारी ने किसी कंपनी में 3 साल तक नौकरी कर ली है तो उसे ग्रेच्युटी मिलेगी। 

NPS में 14% योगदान देगी मोदी सरकार
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से बढ़ाकर मूल वेतन का 14 प्रतिशत कर दिया है। जबकि एनपीएस में कर्मचारियों का न्यूनतम योगदान 10 प्रतिशत पर बना रहेगा। इसके साथ ही कर्मचारियों को 10 प्रतिशत तक व्यक्तिगत योगदान पर आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत कर योग्य आय से छूट भी मिल जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में सरकारी कर्मचारियों को कुल कोष में से 60 प्रतिशत अंतरित करने को मंजूरी दी गई जो फिलहाल 40 प्रतिशत है। 

मोदी राज में देश के कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा हुई मजबूत
मोदी सरकार के फैसलों से कामगारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है। देश के संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के अधिकारों को प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया। देश में, आजादी के बाद से कांग्रेस की सरकारों के दौरान कामगारों के अधिकार सिर्फ और सिर्फ फाइलों में ही बंद होकर रह गये थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कामगारों को उपक्रमों से अधिकार दिलवाने के लिए कानूनी उलझनों को खत्म कर दिया।

कामगारों को अधिकार मिलना सुनिश्चित किया
कामगारों के स्वास्थ्य, पेंशन, भत्ते, सुरक्षा आदि से संबंधित अधिकारों को सुनिश्चित कराना सरकार के लिए सरल हो चुका है। देश के 5.85 करोड़ उपक्रमों को मात्र 5 रजिस्टरों में सारी जानकारी वेबपोर्टल-श्रम सुविधा पोर्टल- के माध्यम से देनी होती है। सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना पूरी तरह से बंद हो गया है, साथ ही इंस्पेक्टर राज भी बंद हो चुका है।

असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा
मोदी सरकार देश के 47 करोड़ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सम्मानजनक और सुविधापूर्ण बनाने के लिए असंगठित श्रमिक सूचकांक संख्या (UWIN) कार्ड दे रही है। सभी कामगारों की UWIN को आधार संख्या से जोड़ कर बैंक खातों से जोड़ा जा रहा है। खातों के जरिए, सरकार असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पेंशन, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के लिए दी जा रही आर्थिक सहायता को सीधे खातों में दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी डीबीटी के जरिए, कामगारों को न केवल आर्थिक सहायता दे रहे हैं बल्कि हजारों करोड़ रुपये से अधिक के धन का दुरुपयोग होने से बचाया है।

संगठित क्षेत्र में गरीब कामगारों के लिए बेहतर अवसर बनाया
प्रधानमंत्री मोदी, एक तरफ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए सम्मानजनक जीवन की परिस्थितियां बना रहे हैं तो दूसरी तरफ संगठित क्षेत्र के 8 प्रतिशत कामगारों के अधिकारों को सुनिश्चित करने और समाजिक सुरक्षा को उन्नत करने का काम किया है। संगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों को सीधे खाते में वेतन को दिए जाने को सुनिश्चिचत करने के लिए 50 लाख से अधिक जन धन खाते खोले गये। Employees’ Provident Fund में एक करोड़ नये श्रमिकों का खाता खोला जा चुका है। संगठित क्षेत्र के गरीब कामगारों को स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा देने के लिए ESIC की सुविधा को उन्नत करने के साथ साथ सदस्यों की संख्या बढ़ायी जा रही है। 

पेंशनधारियों के लिए पेंशन मिलना सरल किया
प्रधानमंत्री मोदी कामगारों की छोटी से छोटी समस्याओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। पेंशनधारियों के लिए हर साल बैंकों में जाकर सत्यापन कराने की समस्या को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है, अब डिजिटल सत्यापन के माध्यम से घर बैठे ही कोई बुजुर्ग अपना भत्ता पा सकता है। अब तक 1.94 करोड़ से भी अधिक पेंशनधारियों को यह सुविधा मिल चुकी है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी की योजनाओं से सभी कामगारों को तेजी से लाभ मिल रहा है।

जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी ने संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के जीवन को सरल और सशक्त बनाने के लिए योजनाओं को जितनी तेज गति से लागू किया है वह अपने आपमें एक मिसाल है।

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