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नीतीश गये बीजेपी के साथ तो कुछ नेताओं को मिर्ची क्यों लगी ?

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बिहार में नीतीश कुमार के एनडीए में जाने से कुछ नेताओं को बड़ी तीखी मिर्ची लगी है। 20 महीने में ही महागठबंधन के टुकड़े होने पर कांग्रेस परिवार और आरजेडी परिवार का दर्द तो समझा भी जा सकता है। लेकिन जेडीयू में भी कुछ नेता ऐसे हैं जो बिन पानी की मछली की तरह छटपटाने लगे हैं। नीतीश के फैसले के खिलाफ पार्टी के जिन नेताओं ने बगावती सुर अपनाये हैं उनमें शरद यादव और अली अनवर जैसे लोग शामिल हैं। जबकि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और दिग्विजय सिंह ने जमकर भड़ास निकाली है।

अली अनवर
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर इस्तीफा देते हुए कहा था, कि वो अपनी अंतरात्मा की आवाज पर ऐसा कर रहे हैं। लेकिन नीतीश की ही पार्टी के राज्यसभा सांसद अली अनवर ने कहा है कि वो नीतीश की अंतरात्मा की आवाज से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार उनका जमीर उन्हें बीजेपी के साथ जाने से रोकता है। वैसे कहा जा रहा है कि अली अनवर का सियासी इतिहास देखा जाय तो उनका जमीर गलत नहीं कह रहा। क्योंकि ये वही व्यक्ति हैं जिन्होंने अपनी अंतररात्मा से आतंकवादी इशरत जहां को बिहार की बेटी कहकर बुलाया था। अब सवाल तो उठेगा ही कि अगर उनका जमीर आतंकवादियों की अंतरात्माओं के लिये सोचता है, तो समाज में अमन-चैन की जिंदगी की चाहत रहने वाले आम बिहार वासियों की चिंताओं के बारे में कैसे सोच सकता है ?

शरद यादव
जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव भी नीतीश कुमार के फैसले पर बहुत नाराज हैं। उनका आरोप है कि नीतीश कुमार ने सरकार बनाने का फैसला बहुत जल्दीबाजी में लिया। इसीलिए वो नीतीश के फैसले का समर्थन नहीं करेंगे। सवाल है कि शरद यादव अब किस बात का इंतजार करना चाहते थे। कहा जाता है कि लालू यादव की ये प्रवृत्ति ही नहीं है कि वो बिना किसी दबाव में सत्ता जैसी चीज छोड़ दें। इस बात को शरद यादव से बेहतर कौन समझ सकता है। या फिर वो तोड़-फोड़ की राजनीति का इंतजार करना चाहते थे। क्योंकि कहा जा रहा है कि लालू यादव जेडीयू के विधायकों को तोड़ सकते थे, इसीलिए नीतीश ने तुरंत फैसला लेकर समझदारी ही दिखाई। चर्चा ये भी है कि बिहार में 15 दिनों से अधिक से जारी लालू परिवार की नौटंकी पर चुप रहने के बाद अब वो राहुल गांधी से मिलने की तैयारी में हैं।

राहुल गांधी
नीतीश कुमार से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी नाराज हैं। वो इतने तिलमिलाए हुए हैं कि उन्होंने नीतीश कुमार पर धोखा देने का आरोप तक लगा दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया है कि नीतीश जैसा व्यक्ति स्वार्थ के लिये कुछ भी कर सकता है। लेकिन राहुल की एक बात किसी के समझ में नहीं आ रही। उन्होंने कहा है कि नीतीश और बीजेपी की दोस्ती की प्लानिंग के बारे में उन्हें 3-4 महीने से पता था। अब राहुल जी इतने समझदार हैं तो उन्हें प्लानिंग की प्लानिंग को रोकने से किसने रोका? नीतीश के अनुसार वो तो वो बहुत उम्मीद लेकर राहुल से मिले थे, तो उन्होंने उनकी समस्या का समाधान क्यों नहीं कराया ? कहने वाले तो कह रहे हैं कि राहुल गांधी, नीतीश पर आरोप लगाकर अपनी नाकामी छिपाना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि राहुल तो इसलिये नाराज हैं कि बिहार में बिना किसी ठोस आधार के हाथ आई सत्ता भी अब गंवा चुके हैं।

दिग्विजय सिंह
नीतीश के फैसले से जब राहुल को मिर्ची लगी हुई है, तो उसकी पीड़ा में बाकी कांग्रेस न जलें ऐसा कैसे हो सकता है। राहुल के सियासी गुरु कहलाने वाले दिग्विजय सिंह भी नीतीश के फैसले से बहुत आहत हुए हैं। उन्होंने भी वैसे तर्क दिये हैं, जैसे- क्या कोई ट्रेन छूटी जा रही थी? कोई चोरी-डकैती हो रही थी रातों-रात। नीतीश जी हमेशा नैतिकता की बात करते हैं क्या यही नैतिकता है? जनता ने आपको बीजेपी-संघ के विरोध में वोट दिया था। सवाल उठना लाजिमी है कि दिग्विजय अब क्यों परेशान हो रहे हैं ? समय रहते राहुल को क्यों नहीं समझाया ?उन्हें तो 3-4 महीने पहले से पता भी था। लालू यादव ने पहले चारा घोटाला करके बिहार के खजाने को लूट लिया। यूपीए सरकार में जितने दिन मंत्री रही उस दौरान भी देश के खजाने को लूटने का आरोप लगा। एक गंभीर भ्रष्टाचार का आरोपी बिहार में उप मुख्यमंत्री पद से टस से मस नहीं हो रहा था। आपको कभी जल्दीबाजी नहीं हुई। क्या इसके बाद भी आप बिहार और देश के सत्यानाश तक का इंतजार करना चाहते थे ?

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