Home समाचार योग दिवस में शामिल हों एक परिवार की तीन पीढ़ी, सेल्फी जरूर...

योग दिवस में शामिल हों एक परिवार की तीन पीढ़ी, सेल्फी जरूर भेजें-प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री के मन की बात का 32वां संस्करण

1681
SHARE

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो पर अपने मन की बात के 32वें संस्करण की शुरुआत दुनिया भर के लोगों को रमजान के पवित्र महीने की शुभकानाएं देने के साथ की। इसके साथ ही उन्होंने 5 जून के विश्व पर्यावरण दिवस और 21 जून के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर देशवासियों से बढ़-चढ़कर भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्व पर्यावरण दिवस की इस बार की थीम Connecting people to nature का जिक्र करते हुए कहा कि ये थीम दरअसल back to basics है जिसमें प्रकृति से जुड़कर हम स्वयं से जुड़ रहे होते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा हमारे पूर्वजों ने की थी..जिसका हमें लाभ मिल रहा है। प्रकृति के साथ जुड़कर हम पर्यावरण की चिंता करेंगे तो इससे आने वाली पीढ़ियों को भी फायदा होगा।

योग दिवस पर ‘तीन साल तीन पीढ़ी’
प्रधानमंत्री ने योग को भारत की ओर से विश्व जगत को दी गई एक अमूल्य भेंट बताते हुए कहा कि 21 जून अब एक जाना-पहचाना दिन बन गया है। भारत बिखराव के शिकार रहे विश्व जगत को योग के साथ एक सूत्र में पिरोने में सफल हो रहा है। उन्होंने कहा कि बहुत कम समय के भीतर विश्व के कोने-कोने में योग फैल चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवनशैली और तनाव के बीच योग की भूमिका आज और बढ़ गई है और योग सिर्फ व्यायाम नहीं इसमें Wellness और Fitness की गारंटी भी है। योग दिवस के तीसरे वर्ष पर इस बार परिवार की तीन पीढ़ियों के एक साथ योग करने का एक विशेष सुझाव मिला है जिसमें तीन पीढ़ी यानी दादा-दादी या नाना-नानी से लेकर परिवार में उनकी तीसरी पीढ़ी तक एक साथ योग करें। प्रधानमंत्री ने लोगों से नरेंद्र मोदी ऐप और MyGov पर तीन पीढ़ी के एक साथ योग करने की तस्वीरें भेजने की अपील की। उन्होंने कहा कि कल आज और कल की ये तस्वीरें देश और दुनिया के लिए एक कौतुक जगाएगी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अभी से योग की प्रैक्टिस में लग जाने का आह्वान किया और कहा कि अगले तीन हफ्तों तक वो योग के विषय को खूब प्रचारित-प्रसारित करें।

फैल चुका है स्वच्छता अभियान
मन की बात में देश भर में फैले स्वच्छता अभियान का जिक्र करते हुए मुंबई से नैना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से स्वच्छता अभियान एक आंदोलन का रूप ले चुका है..और देश के कोने-कोने में इसको लेकर एक अभूतपूर्व जागरूकता दिख रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए ये बहुत आनंद का विषय है कि आज उनकी किसी जगह की यात्रा को भी स्वच्छता से जोड़ दिया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि Solid waste और Liquid Waste को वो अलग-अलग डस्टबीन में डालें ताकि सही तरीके से Waste Management हो सके और इसका भी लाभ समाज को मिले।

रंग लाया अफरोज का अभियान
प्रधानमंत्री ने अपनी मन की बात में स्वच्छता के अनुपम प्रयास के लिए मुंबई के अफरोज शाह की भरपूर प्रशंसा की। अफरोज ने गंदगी के अंबार में डूबे मुंबई के वर्सोवा बीच की साफ-सफाई का बीड़ा उठाया..जिसमें उन्हें देखते ही देखते इलाके के नागरिकों का भरपूर सहयोग मिला। इस प्रयास से वर्सोवा बीच का रंग-रूप बिल्कुल बदल चुका है और ये एक सुंदर बीच बन चुका है। अफरोज को इस प्रयास के लिए United Nations Environment Programme-UNEP का Champions of the Earth अवॉर्ड भी मिला। ये अवॉर्ड पाने वाले वो पहले भारतीय हैं जिसके लिए प्रधानमंत्री ने उन्हें विशेष बधाई दी।
रियासी खुले में शौचमुक्त होने वाला जम्मू कश्मीर का पहला ब्लॉक
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर के रियासी ब्लॉक का भी जिक्र किया..जो खुले में शौच से मुक्त होने वाली जम्मू कश्मीर का पहला ब्लॉक बन गया। प्रधानमंत्री ने इसका विशेष उल्लेख किया कि रियासी के इस अभियान का पूरा नेतृत्व महिलाओं ने किया जो बधाई की पात्र हैं।

Comfort Zone से निकल रहे युवा
प्रधानमंत्री ने कहा कि अपनी पिछली मन की बात में उन्होंने युवाओं से कुछ नया करने की- Comfort Zone से बाहर आकर कुछ विशेष सीखने और करने की अपील की थी, जिस पर युवाओं ने बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है। दीक्षा कात्याल ने मन की बात में बताया कि प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद उन्होंने पढ़ने की ठानी और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी कई कहानियां पढ़ डालीं। इससे उन्हें भगत सिंह जैसे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारियां भी मिलीं और वो बहुत प्रभावित भी हुईं। प्रधानमंत्री ने इस बात के साथ ही आजादी के बड़े सेनानी रहे वीर सावरकर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए वीर सावरकर जैसे सेनानियों ने क्या यातनाएं झेलीं इसका पता अंडमान की सेल्युलर जेल जाने पर चलता है। प्रधानमंत्री ने आजादी के असली नायकों से जुड़ी कहानियों को नजदीक से जाकर देखने की अपील भी की।

लोकतंत्र में देना चाहिए सरकार को हिसाब
प्रधानमंत्री की ये मन की बात उस माहौल में हुई, जब देश की जनता उनकी सरकार के तीन साल के परिवर्तनकारी और क्रांतिकारी कामकाज को लेकर जश्न मना रही है। जनता ने ये महसूस किया है कि कैसे एक सुस्त और भ्रष्टाचार से भरी शासन व्यवस्था से निकालकर अपनी अथक मेहनत के साथ मोदी सरकार देश की स्थिति को तेजी से पटरी पर लाने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने पर अलग-अलग पैमाने पर किये जा रहे लेखा-जोखा की चर्चा की। उन्होंने सरकार का समर्थन और कमियां गिनाने वाले सभी का आभार जताया और कहा कि उनकी सरकार हर बात से सीखते हुए आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में उत्तम प्रक्रिया यही है कि सरकार को जवाबदेह होना चाहिए, कामकाज का हिसाब देना चाहिए।

अब मन की बात से जुड़ी पुस्तक भी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात पर आई पुस्तक के विमोचन के लिए राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक से मन की बात को एक नया आयाम मिलेगा। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अकबर साहेब का विशेष उल्लेख किया जिन्होंने अबु धाबी से ‘मन की बात’ से जुड़े विषयों के लिए स्केच तैयार करने का प्रस्ताव रखा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि बिना एक रुपया लिए अकबर साहेब ने मन की बात को कला का रूप दे दिया।

26 मई को राष्ट्रपति भवन में ‘मन की बात-रेडियो पर सामाजिक क्रांति’ नाम की पुस्तक का विमोचन माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती सुमित्रा महाजन ने माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के हाथों में पुस्तक की पहली प्रति सौंपकर की। उस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जनता के सबसे चहेते कम्युनिकेटर हैं। सुमित्रा महाजन ने कहा था कि मन की बात उसी से की जाती है जो आपके सबसे निकट होता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में सवा सौ करोड़ देशवासी बसते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि अपने इस रेडियो कार्यक्रम के माध्यम से वो हिंदुस्तान के हर परिवार का सदस्य बन जाएंगे।
रमजान के पवित्र महीने की बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रमजान का पवित्र महीना प्रारंभ होने पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत ये गर्व कर सकता है कि दुनिया के सभी धर्मों के लोग यहां रहते हैं, यहां हर प्रकार की पूजा पद्धति है लेकिन लोगों ने साथ में जीने की कला आत्मसात की है। उन्होंने कहा कि शांति, एकता और सद्भावना के इस मार्ग को आगे ले जाने में रमजान का महीना सहायक होगा।

 

Leave a Reply