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देश के 15वें उपराष्ट्रपति बने श्री एम वेंकैया नायडू

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श्री एम वेंकैया नायडू देश के 15वें उपराष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हो गए हैं। उन्हें उन्होंने यूपीए के गोपाल कृष्ण गांधी को 272 मतों से हराया है। राज्यसभा के महासचिव श्री शमशेर के शरीफ ने श्री नायडू को निर्वाचित घोषित किया। इस बार उपराष्ट्रपति चुनाव में 98.21 प्रतिशत मतदान हुए। कुल 785 सांसदों में से 771 सांसदों ने मतदान किया। इसमें 11 मत को निरस्त कर दिया गया। 760 वैध मतों में से श्री नायडू को 516 मत मिले जबकि गोपाल कृष्ण गांधी को सिर्फ 244 वोट ही मिले। जीत के लिए 381 मतों की आवश्यकता थी। श्री नायडू को अनुमान से अधिक मत मिले। आंकलन से अधिक मत मिलना, एकजुट विपक्ष के दावों की पोल खोलता है।

जीत की घोषणा के साथ ही बधाइयों का तांता लग गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री नायडू को जीत की बधाई देते हुए एक के बाद एक दो ट्वीट किए।


14 सांसदों ने नहीं डाला वोट
कुल 785 में से 771 सांसदों ने अपने मत का उपयोग किया। जिन 14 सांसदों ने मत नहीं दिया, उनमें कांग्रेस और भाजपा के दो-दो, आईयूएमएल के दो, टीएमसी के चार, एनसीपी का एक, पीएमके का एक और दो निर्दलीय सांसदों ने मतदान नहीं किया। भाजपा के विजय गोयल और सांवरलाल जाट जबकि कांग्रेस की मौसम नूर और रानी नाराह ने अपना वोट नहीं डाला। 

राज्यसभा को मिलेगा उनके अनुभव का लाभ
उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद देश और राज्यसभा के संचालन में श्री एम. वेंकैया नायडू के अनुभव का लाभ मिलेगा। वह राजनीतिक चातुर्य, हाजिर जवाबी, फाइटर तेवर, आक्रामक अंदाज, नम्र स्वभाव, विरोधियों को भी अपना बना लेने की कला, शासन चलाने के लिए सूझबूझ, समझदारी भरे निर्णय लेने की क्षमता, निडर शैली और जुझारूपन व्यक्तित्व के धनी हैं। उनके पास संगठन और शासन का लंबा अनुभव भी है।

चार बार निर्विरोध चुने गए उपराष्ट्रपति
14वें उपराष्ट्रपति के चुनाव में हामिद अंसारी को 2012 के उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के उम्मीदवार जसवंत सिंह के मुकाबले 490 वोट मिले थे, जबकि जसवंत सिंह को 238 वोट मिले थे। इससे पहले चार बार ऐसे चुनाव हुए हैं जिनमें उपराष्ट्रपति निर्विरोध चुने गए। एस. राधाकृष्णन (1952 और 1957), मोहम्मद हिदायतुल्ला (1979) और शंकर दयाल शर्मा (1987) उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध चुने गए थे।

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