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विश्व का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर भारत

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25 सितंबर, 2014 को मेक इन इंडिया की शुरुआत हुई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के विज्ञान भवन में उद्यमियों को संबोधित करते हुए एफडीआई का एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और कहा- FDI यानि फर्स्ट डेवलप इंडिया। उन्होंने निवेशकों से आग्रह किया था कि वह भारत को सिर्फ एक बाजार के रूप में न देखे, बल्कि इसे एक अवसर समझे।

पीएम मोदी और मेक इन इंडिया के लिए चित्र परिणाम

प्रधानमंत्री की इस अपील को देशी-विदेशी उद्योग जगत ने सकारत्मक तरीके से लिया और उनमें एक नये उत्साह का संचार हुआ। इसी का परिणाम है कि बीतते समय के साथ भारत अब विश्व का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है।

पीएम मोदी और मेक इन इंडिया के लिए चित्र परिणाम

95 मोबाइल कंपनियों ने लगाया यूनिट
भारत तेजी से इलेक्‍ट्रॉनिक एंड मोबाइल मैन्‍यूफैक्‍चरिंग का हब बनता जा रहा है। निवेशकों के बढ़े भरोसे का अंदाजा इस बात से भी लगता है कि बीते तीन सालों में 95 मोबाइल कंपनियों ने भारत में अपना यूनिट लगाया है। मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों में से 32 ने तो केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में फैक्‍ट्रियां लगाई हैं।

MOBILE UNIT IN INDIA के लिए चित्र परिणाम

स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
इसका लक्ष्य रक्षा के क्षेत्र में विदेशों पर से निर्भरता खत्म करने की है। पिछले कुछ सालों में इसका बहुत ही अधिक लाभ भी मिल रहा है। रक्षा मंत्रालय ने भारत में निर्मित कई उत्पादों का अनावरण किया है, जैसे HAL का तेजस (Light Combat Aircraft), composites Sonar dome, Portable Telemedicine System (PDF),Penetration-cum-Blast (PCB), विशेष रूप से अर्जुन टैंक के लिए Thermobaric (TB) ammunition, 95% भारतीय पार्ट्स से निर्मित वरुणास्त्र (heavyweight torpedo) और medium range surface to air missiles (MSRAM)।

TEJAS के लिए चित्र परिणाम

मेक इन इंडिया के दो युद्धपोत
अभी तक सरकारी शिपयार्डों में ही युद्धपोतों के स्वदेशीकरण का काम चल रहा था, लेकिन देश में पहली बार नेवी के लिए प्राइवेट सेक्टर के शिपयार्ड में बने दो युद्धपोत पानी में उतारे गए हैं। रिलायंस डिफेंस एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड ने 25 जुलाई, 2017 को गुजरात के पीपावाव में नेवी के लिए दो ऑफशोर पैट्रोल वेसेल (OPV) लॉन्च किए, जिनके नाम शचि और श्रुति हैं।

F-16 का मेनटेनेंस हब बनेगा भारत
अमरीकी एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन को अगर भारत में एफ-16 विमान बनाने की अनुमति मिल गई तो भारत एफ-16 विमानों के रखरखाव का ग्लोबल हब बन सकता है। ऐसी उम्मीद है कि लॉकहीड मार्टिन टाटा के साथ मिलकर भारत में एफ-16 के ब्लॉक 70 का निर्माण करेगी। दरअसल इस वक्त दुनिया में करीब 3000 एफ-16 विमान हैं। भारत इनकी सर्विसिंग का केंद्र बन सकता है।

भारत में बनाओ, भारत में बना खरीदो
इस नीति के तहत रक्षा मंत्रालय ने 82 हजार करोड़ की डील को मंजूरी दी है। इसके अतर्गत Light Combat Aircraft (LCA), T-90 टैंक, Mini-Unmanned Aerial Vehicles (UAV) और light combat helicopters की खरीद भी शामिल है। इस क्षेत्र में MSME को प्रोत्साहित करने के लिए कई सुविधाएं दी गई हैं।

नीतिगत पहल और निवेश
रक्षा उत्पादों का स्वदेश में निर्माण के लिए सरकार ने 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को मंजूरी दी हुई है। इसमें से 49 प्रतिशत तक की FDI को सीधे मंजूरी का प्रावधान है, जबकि 49 प्रतिशत से अधिक के FDI के लिए सरकार से अलग से मंजूरी लेनी पड़ती है।

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NRI रोज खोल रहे 3 से 4 स्‍टार्टअप्‍स
अमेरिका में जॉब कर रहे भारतीय आईआईटीयन अब नौकरी छोड़कर देश में आकर औसतन 3 से 4 स्‍टार्ट अप रोज शुरू कर रहे हैं। वहीं देश के यंग आंत्रप्रेन्योर अपना कारोबार तेजी से बढ़ा रहे हैं और इन्‍वेस्‍टर से अरबों रुपए का निवेश पा रहे हैं। अमेरिका में सिलिकॉन वैली में नई खोज में 51 प्रतिशत हिस्‍सेदारी आईटी बेस्‍ड इनोवेशन की होती है और इसमें से 14 प्रतिशत का क्रेडिट भारतीयों को जाता है।

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टेक्नोलॉजी एंड टैलेंट में भारत आगे
बीते कुछ वर्षों में भारत ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। ISRO द्वारा एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च के करने के बाद भारत की धाक बढ़ी है। भारत ने पूरे विश्व में अपने इंजीनियर और साइंटिस्ट के लिए बड़ी मांग पैदा की है। दुनिया में अब भारत से टॉप स्तर के टेक्नोलॉजी और साइंटिफिक ब्रेन को अपने यहां खींचने की होड़ लग गई है।

पीएम मोदी और इसरो के लिए चित्र परिणाम

विदेशी निवेश में चीन को पछाड़ा
2015 में पहली बार भारत ने चीन को विदेशी निवेश के मामले में पीछे छोड़ दिया था। जहां भारत को 63 बिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला था वहीं चीन को महज 56 बिलियन और अमेरिका को महज 59 बिलियन डॉलर मिला था।

2016: FDI में अव्वल रहा भारत
फाइनेंसयल टाइम्स लिमिटेड के एफडीआई इंटेलिजेंस के आंकडों के अनुसार FDI के मामले में भारत अव्वल है। लगातार दूसरे साल दुनिया में सबसे ज्यादा नया प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने वाला देश रहा है। 2016 में भारत में 809 परियोजनाओं में 62.3 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया।

एफडीआई इक्विटी प्रवाह में बड़ी वृद्धि
2014 में मेक इन इंडिया इनिसिएटिव के बाद इक्विटी प्रवाह में जबरदस्त बढ़ोतरी है। अक्टूबर 2014 से मार्च 2017 के आंकड़ों को देखें तो 30 महीने में यह 99,72 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह मेक इन इंडिया इनिसिएटिव से पहले के तीस महीनों से 62 प्रतिशत अधिक। यानि अप्रैल 2012 से सितंबर 2014 के बीच यह आंकड़ा 61.41 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 14 प्रतिशत की वृद्धि
विनिर्माण क्षेत्र की बात करें तो यह 14 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मेक इन इंडिया की सफलता की कहानी कहती है। अप्रैल 2012 से सितंबर 2014 के 35.52 बिलियन डॉलर के मुकाबले अक्टूबर 2014 से मार्च 2017 के दौरान यह बढ़कर 40.47 बिलियन डॉलर हो गया।

एफडीआई में 51 प्रतिशत की वृद्धि
मेक इन इंडिया इनिशियेटिव से पहले अगर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह की बात करें तो अप्रैल 2012 से सितंबर 2014 के तीस महीनों के दौरान 90.98 बिलयन डॉलर था। जबकि इसके मुकाबले अक्टूबर 2014 से मार्च 2017 के दौरान इसमें 51 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह आंकड़ा 137.44 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

पीएम मोदी और एफडीआई के लिए चित्र परिणाम

 

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