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मोदी सरकार ला रही है शिक्षा में बड़ा बदलाव, ‘हीरा’ युग में कदम

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किसी भी समस्या के सटीक समाधानों को लागू करने की क्षमता, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में कमाल की है। शिक्षा के क्षेत्र में जिस निर्णय को दशकों से कोई सरकार लागू करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही था, आखिरकार उसे लागू करने का निर्णय, प्रधानमंत्री ने ले ही लिया। अब देश में यूजीसी और एआईसीटीई को मिलाकर एक नई एकल संस्था HEERA ( Higher Education Empowerment Regulatory Authority) बनायी जाएगी। इस तरह की एकल संस्था का विचार पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के समय में गठित की गयी यशपाल समिति की मुख्य सिफारिश थी, लेकिन इसे मनमोहन व सोनिया की सरकार लागू करने में नाकाम रही थी।

HEERA से बदलेगी तस्वीर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार बनते ही, 3 अगस्त 2014 को यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष हरिगौतम के नेतृत्व में, उच्च शिक्षा में सुधार के लिए कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी की भी यही सिफारिश थी कि दो संस्थाओं के स्थान पर एकल संस्था होनी चाहिए। कमेटी की सिफारिशें आते ही, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे लागू करने का निर्णय ले लिया। यही मोदी सरकार औऱ पूर्ववर्ती सरकारों में अंतर है।

विशेषज्ञों की आम राय है कि उच्च शिक्षा को टेक्निकल और नानटेक्निकल के अलग अलग दायरों में बांधकर संचालित करने का तरीका, विश्व में अपनाए जा रहे आधुनिक एकल तरीके की तुलना में पुराना और वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। एकल संस्था से विभिन्न संस्थानों और पाठ्यक्रमों के समायोजन से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आयेगा, इस तरह से देश के संस्थानों के स्तर को विश्वस्तर का बनाने में मूलभूत जरूरत पूरी होगी। एकल संस्था के बनने से, सबसे बड़ी बात यह होगी कि यूजीसी और एआईसीटीसी के संस्थानों को नियंत्रित करने वाले पुराने पड़ चुके कायदे-कानून खत्म हो जाएंगे।

 इस एक निर्णय से शिक्षा के क्षेत्र में जबरदस्त बदलाव आयेगा, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी इस निर्णय को जल्द से जल्द लागू करना चाहते है। इसके लिए जरूरी कानूनों में बदलाव करने के विचार के लिए एक समीति  का भी गठन हो चुका है, जिसके, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत और मानव संसाधन मंत्रालय में, उच्च शिक्षा सचिव, के के शर्मा, सदस्य हैं।

समाधान लाते हैं मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले तीन सालों में देश की समस्याओं के समाधान के लिए कठिन से कठिन निर्णयों को, राजनीतिक नफे नुकसान से ऊपर उठकर, लागू करने की क्षमता दिखाई है। ऐसे निर्णयों की एक पूरी श्रृखंला है—

  • देश में हर स्थान पर फैली गंदगी की समस्या के समाधान के लिए स्वच्छता अभियान
  • देश के बच्चों में लिंगानुपात के संतुलन की समस्या के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
  • शहर और गांव के गरीब परिवारों को चूल्हे की समस्या से मुक्त कराने के लिए उज्जवला योजना
  • देश में परिवारों में बिजली के बढ़ते खर्च की समस्या को कम करने के लिए उजाला योजना
  • देश में बेरोजगार युवकों के हाथ में कोई हुनर न होने की समस्या के लिए कौशल विकास योजना
  • देश में उघम लगाने के लिए युवाओं के आगे न आने की समस्या के समाधान के लिए मुद्रा योजना और स्टार्टअप योजना।
  • देश के सभी के पास बैंक खाता न होने की समस्या के समाधान के लिए जन धन योजना
  • शहरी और ग्रामीण गरीब परिवारों को छत न मिलने की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना
  • देश के कर ढांचे की समस्या के समाधान के लिए जीएसटी
  • काले धन और भ्रष्टाचार की समस्या के समाधान के लिए नोटबंदी और बेनामी संपत्ति कानून

इन निर्णयों को लागू करने की प्रधानमंत्री मोदी की क्षमता ने देश की जनता का विश्वास जीता है, तभी तो हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में जनता ने प्रधानमंत्री के विकास के विज़न के लिए पूरा साथ दिया।

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