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मोदी सरकार ने करदाताओं को राहत देने के लिए बढ़ाई आयकर अपीलों की मौद्रिक सीमा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की कोशिश टैक्स सिस्टम को पारदर्शी और प्रगतिशील बनाने की रही है। अपनी कार्य योजना और कार्यशैली से मोदी सरकार कर संग्रह में हमेशा अव्वल रही है। मोदी सरकार ने जिस प्रकार कर संरचना बनाई है उससे करदाताओं की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई। करदाताओं की संख्या बढ़ने की वजह से ही कर संग्रह में वृद्धि हुई है। साथ ही विभिन्न अपीलीय अदालतों के समक्ष आयकर विभाग की काफी संख्या में अपीलें लंबित पड़ी हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने करदाताओं की शिकायतों/मुकदमों को प्रभावी तरीके से कम करने और विभाग की सहायता करने के लिए अपीलीय अदालतों के समक्ष विभागीय अपील दर्ज करने के लिए मौद्रिक सीमा बढ़ा दी गई है। अब आयकर अपीलीय प्राधिकरण में अपील की मौद्रिक सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख कर दी गई है। इसी तरह उच्च न्यायालय में 50 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ और सुप्रीम कोर्ट में अपील की मौद्रिक सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ कर दी गई है। इससे मामले का निपटारा जल्द और तेजी से होने की उम्मीद है।

अपील फोरम मौजूदा सीमा (रुपये में) संशोधित सीमा (रुपये में)
आयकर अपीलीय प्राधिकरण 20 लाख 50 लाख
उच्च न्यायालय  50 लाख एक करोड़
उच्चतम न्यायालय एक करोड़ दो करोड़

मोदी सरकार में आयकर भरने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। डालते हैं एक नजर- 

प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी
नोटबंदी के बाद प्रत्यक्ष कर संग्रह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां वित्तीय वर्ष 2017-18 में  प्रत्यक्ष कर संग्रह 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। वहीं यह 2016-17 में 8.5 लाख करोड़, 2015-16 में 7.4 लाख करोड़ और 2014-15 में 6.9 लाख करोड़ रुपये था।

कॉर्पोरेट और पर्सनल इनकम टैक्स में बढ़ोतरी
राजस्व में बढ़ोतरी का ट्रेंड नोटबंदी के दो साल बाद वित्त वर्ष 2018-19 में भी जारी रहा, कॉर्पोरेट इनकम टैक्स 14 फीसदी और पर्सनल इनकम टैक्स 13 फीसदी की दर से बढ़ा। सूत्रों के मुताबिक अडवांस टैक्स के तहत वॉलंटरी टैक्स पेमेंट भी 14 फीसदी की गति से बढ़ रहा है, यदि इसे बढ़ते डिजिटलाइजेशन के साथ देखें, तो साफ-सुथरे इकनॉमिक सिस्टम की ओर इशारा करता है।

आयकर रिटर्न भरने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि
इनकम टैक्स रिटर्न फाइलिंग की संख्या में इस साल फरवरी तक 1 करोड़ से अधिक नए फाइलर्स जुड़ चुके हैं। नोटबंदी वाले साल 2016-17 में नए इनकम टैक्स फाइलर्स की संख्या में 29 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। एक सूत्र ने कहा, ‘नए टैक्स फाइलर्स में स्पष्ट इजाफे का श्रेय फॉर्मल चैनल्स में कैश ट्रांसफर होने की वजह से उच्च अनुपालन को दिया जा सकता है, जोकि नोटबंदी की वजह से हुआ।’

900 करोड़ रुपये का कालाधन जब्त
नोटबंदी ने कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक किया। नवंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच 900 करोड़ रुपये का कालाधन जब्त किया गया। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED)  ने सतर्कता दिखाते हुए कालाधन जब्त करने में बड़ी कामयाबी हासिल की। नोटबंदी के बाद ईडी ने 1,000 फर्जी कंपनियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। साथ ही FEMA और PMLA के तहत 3,700 मामले दर्ज किए।

व्यक्तिगत और कारोबारी पारदर्शिता में बढ़ोतरी
नोटबंदी के बाद व्यक्तिगत रूप से और कारोबार में पारदर्शी साधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिला। सूत्र के मुताबिक 18 लाख ऐसे केसों की पहचान हुई थी, जिसमें कैश डिपॉजिट रिटर्न फाइलिंग से मेल नहीं खा रहा था या उन्होंने रिटर्न फाइल नहीं की थी। ऐसे लोगों को ईमेल और एसएमएस भेजे गए, परिणाम यह है कि टैक्स कलेक्शन बेहतर हो गया।

बड़ी मात्रा में कैश जमा होने से अर्थव्यवस्था हुई मजबूत
नोटबंदी के बाद बड़ी मात्रा में कैश डिपॉजिट हुए। इसके अलावा, घरेलू सहायकों और श्रमिकों आदि के द्वारा संचालित खातों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। उन्होंने पुरानी करंसी को बैंकों में जमा किया और इससे उनका टीन के बक्सों और बिस्तर के नीचे रखे जाने वाला धन सुरक्षित हो गया।

 

 

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