Home नरेंद्र मोदी विशेष प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निभाया गुरु को दिया वचन- स्वामी परमात्मानंद

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निभाया गुरु को दिया वचन- स्वामी परमात्मानंद

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय परंपरा और अध्यात्म के प्रतिनिधि-पुरुष रहे हैं। हिमालय के साथ ही ऋषिकेश से भी उनका आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। यही वजह है कि पीएम मोदी के गुरु ब्रह्मलीन स्वामी दयानंद के दयानंद आश्रम को भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता दिया गया। आश्रम के प्रतिनिधि के तौर पर स्वामी परमात्मानंद शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। स्वामी परमात्मानंद ने पीएम मोदी की जीत को संत समाज के आशीर्वाद का फल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने गुरु को वचन दिया था कि उत्तराखंड के चार धाम यात्रा को सुलभ और सुगम बनाया जाएगा और यह वचन आज ऑल वेदर रोड के रूप में पूरा हो रहा है।  

दैनिक जागरण से फोन पर बातचीत में स्वामी परमात्मानंद ने बताया कि वर्ष 2016 में स्वामी दयानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए दयानंद आश्रम आए थे। गुरुदेव का आशीर्वाद लेते हुए उन्होंने वचन दिया था कि चार धाम यात्रा को सुगम बनाया जाएगा। अब उनका यह वचन आकार ले रहा है। दयानंद आश्रम के प्रबंधक गुणानंद रयाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा शपथ लेने से आश्रम में उत्साह का माहौल है, हालांकि आश्रम में टेलीविजन की अनुमति नहीं होने की वजह से वे शपथ ग्रहण समारोह देखने से वंचित रह गए।

गौरतलब है कि ऋषिकेश के मायाकुंड स्थित रामानंद आश्रम के स्वामी अभिराम दास प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां हीरा बेन के आध्यात्मिक गुरु हैं। रामानंद आश्रम में भी गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सफलता के लिए अनुष्ठान किया गया।

पीएम मोदी का जीवन आध्यात्मिकता से ओतप्रोत रहा है। युवावस्था में ही उन्होंने हिमालय का भ्रमण किया था। बर्फीले हिमालय में स्नान और साधुओं की संगति ने ही पीएम मोदी के व्यक्तित्व की रचना की। पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के इस पहलू का उल्लेख किया था। आइए, पीएम मोदी की युवावस्था और हिमालय से जुड़े उनके रोचक अनुभवों के बारे में जानते हैं। 

फौलादी इरादे और देश के लिए समर्पित एकाग्र दृष्टि वाली पीएम मोदी की शख्सियत को बनाने में आखिर किन चीजों को योगदान है- किसी को भी यह उत्सुकता सहज ही हो सकती है। 

दरअसल, भारतीय संस्कृति में मोदी जी की सनातन आस्था ने ही उनके व्यक्तित्व की रचना की है। महज 17 साल की उम्र में वे एक ऐसे परिव्राजक के रूप में भ्रमण पर निकल पड़े थे, जो इस दुनिया और खुद की खोज करना चाहता था। यह वह दौर था, जब जीवन के प्रति उनकी कोई स्पष्ट धारणा या राय नहीं बनी थी। 

‘…बस इतना जानता था कि मुझे कुछ करना है’

पीएम मोदी खुद कहते हैं, “मैं दिशाहीन और अस्पष्ट था। मैं यह नहीं जानता था कि मुझे कहां जाना है, मैं यह भी नहीं जानता था कि मुझे क्या करना है और क्यों करना है। मैं बस इतना जानता था कि मैं कुछ करना चाहता हूं।”  

‘Humans of Bombay’ को दिए अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने अपनी युवावस्था के दो साल की यात्रा के बारे में विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री ने इस ‘फेसबुक इंटरव्‍यू’ में अपने बचपन की कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा, “मैं वहां-वहां गया जहां-जहां ईश्वर मुझे ले जाना चाहते थे। प्रातः काल बर्फीले हिमालय में स्नान करना और साधुओं के साथ सत्संग ने मुझे ब्रह्मांड की लय के साथ तालमेल बिठाना सिखाया। यह मेरे जीवन का अनिश्चित दौर था, लेकिन इसने मुझे कई सवालों के जवाब दिए।”   

‘तभी जिंदगी सही मायने में शुरू होती है’

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने अनुभव किया कि हम सभी अपने विचारों और सीमाओं में बंधे हुए हैं। जब आप असीम के प्रति समर्पण करते हैं, तब आप जान पाते हैं कि आप इस विशाल ब्रह्मांड का एक छोटा सा हिस्सा हैं। जब आप यह समझ जाते हैं तो आपमें अहंकार का कोई अंश नहीं रह जाता और तभी सही मायने में जिंदगी शुरू होती है। मुझे उस वक्त जो अनुभूतियां हुईं, उनसे मुझे अब भी मदद मिलती है। इस अनुभव ने मेरे जीवन में ‘गाइडिंग फोर्स’ का काम किया।”

दरअसल, कोई भी व्यक्ति अगर अपने युवावस्था को याद करे तो उसे खुद में एक ऐसा व्यक्ति दिखेगा, जो उत्सुकता से तो भरा हुआ होता है, लेकिन जिसमें स्पष्टता का अभाव होता है। पीएम मोदी भी इससे अलग नहीं थे। उन्होंने कहा, मैंने सीखा कि शांति, अकेलापन और ध्यान की अवस्था झरने की आवाज में भी प्राप्त की जा सकती है। दो साल बाद मैं जब घर लौटा तो मुझमें एक स्पष्टता थी और जीवन के लिए एक दिशानिर्देश भी था।

सेना के जवान, साधु संगत और अध्यात्म

पीएम मोदी कहते हैं, “किशोरावस्था के दौर में मुझमें बहुत उत्सुकता थी, लेकिन स्पष्टता नहीं थी। मैं सेना के जवानों को यूनीफॉर्म में देखता और सोचता कि देश की सेवा करने का यही एक माध्यम है। लेकिन, जैसे-जैसे रेलवे स्टेशन पर साधु-संन्यासियों के साथ मेरी बातचीत गहराती गई, मैंने अनुभव किया कि अध्यात्म भी एक ऐसी दुनिया है, जिसके बारे में जानने की जरूरत है।”

‘ह्यूमन ऑफ बॉम्बे’ ने पीएम मोदी का इंटरव्यू पांच भागों में प्रकाशित किया है। प्रधानमंत्री ने इसमें अपने बचपन के साथ ही, पहली बार आरएसएस की  बैठक में शामिल होने के बारे में भी बताया है। उन्होंने बताया कि वे भारत के हर हिस्से के लोगों से मिलना चाहते थे।    

‘प्रधानमंत्री का सपना भी असंभव था’

पीएम मोदी से जब पूछा गया कि आठ साल के मोदी से अगर यह पूछा जाता कि क्या वह प्रधानमंत्री बनने का सपना देखता है, तो उसका उत्तर क्या होता ? पीएम मोदी ने कहा, “उसका जवाब होता… नहीं, कभी नहीं, मैं ऐसा सोच भी नहीं सकता।”

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