Home नरेंद्र मोदी विशेष ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा को नेतृत्व प्रदान कर रहे प्रधानमंत्री मोदी

‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा को नेतृत्व प्रदान कर रहे प्रधानमंत्री मोदी

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वसुधैव कुटुंबकम… यह वाक्य सनातन संस्कृति का आधार है। ये हमें बताता है कि धर्म, सम्प्रदाय, जाति, लिंग जैसे विभेदों से बहुत ऊपर मानवमात्र के उत्थान और समस्त जगत के कल्याण के लिए कार्य करना ही हमारे मूल्य, हमारी विरासत, हमारी संस्कृति और हमारी परम्परा है। 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश नेतृत्व अपने हाथ में लेते हुए यह संदेश दिया था कि सनातन संस्कृति के आधार मानते हुए उनकी नीति ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की होगी। उन्होंने अपने हर संबोधन में हमेशा मानव कल्याण के साथ विश्व शांति की बात की है और दुनिया को इसी अवधारणा के साथ नेतृत्व प्रदान करने का प्रयास किया है।

आइये हम पीएम मोदी द्वारा किए गए कुछ पहल देखते हैं जो वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा को प्रतिबिम्बित करते हैं।

वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत की वैश्विक राजधानी बन रहा भारत
14 नवंबर, 2015 को लंदन के वेंबले स्टेडियम में संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सर्वप्रथम इंटरनेशनल सोलर अलायंस की बात कही थी। इसके बाद 30 नवंबर, 2015 को ही भारत और फ्रांस ने मिलकर पेरिस में इसका शुरुआत भी कर दी। प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद द्वारा 25 जनवरी, 2016 को हरियाणा के गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन सचिवालय की नींव भी रख दी गई। 11 मार्च को इस अलायंस के पहले सम्मेलन का आयोजन किया गया।

दरअसल पूरी दुनिया में गैरपरंपरागत ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की मुहिम जिस तरह तेज हुई है, उसमें इस सम्मेलन ने भारत को दुनिया में सोलर पावर की राजधानी के तौर पर स्थापित किया है।

वैकल्पिक ऊर्जा में बड़ा बदलाव लाएगी पीएम मोदी की पहल
11 मार्च, 2018 को इंटरनेशनल सोलर अलायंस के प्रथम सम्मेलन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट कहा,  ”इसका सपना पीएम मोदी ने देखा था, जिसको सब मिलकर पूरा कर रहे हैं। दो साल पहले यह सिर्फ एक आइडिया था, जिसपर इतनी जल्दी काम हुआ और अब बड़ा बदलाव हो रहा है।”

दरअसल इंटरनेशनल सोलर अलायंस कर्क और मकर रेखा के बीच स्थित राष्ट्रों को एक मंच पर ला रहा है, क्योंकि यहां धूप की उपलब्धता बहुलता में है। इस प्रयास को वैश्विक स्तर पर ऊर्जा परिदृश्य में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। भारत ने लक्ष्य रखा है कि वह 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन करने लगेगा, इसमें 100 गीगावॉट सोलर और 75 गीगावॉट विंड एनर्जी होगी।

जलवायु परिवर्तन पर दुनिया की अगुआई कर रहा भारत
जलवायु परिवर्तन पर काम करने के लिए भारत वैश्विक नेतृत्व को प्रेरित कर रहा है, क्योंकि भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 40 प्रतिशत हिस्सा 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को नियत समय से 8 साल पहले प्राप्त किया जा सकता है। भारत नवीकरणीय ऊर्जा के विकास में अमेरिका से भी आगे है। भारत ने ऊर्जा के लिए कोयले से सौर की तरफ रूख करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। सौर और पवन ऊर्जा में भारी निवेश से बिजली की कीमतें भी कम हुई हैं।

इसके अतिरिक्त मोदी सरकार यह साहस भी दिखाया है जब अमेरिका ने खुद को पेरिस समझौते से अलग किया तो दुनिया की नजर भारत पर ठहर गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व मंच पर अपनी ताकतवर उपस्थिति दर्ज करा दी है। पिछले वर्ष पेरिस समझौते से बाहर आने के डोनॉल्ड ट्रंप के फैसले के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दिखाया। पीएम मोदी ने कहा, ”पेरिस हो या ना हो, यह हमारा दृढ़ विश्वास है कि हमारे भविष्य की पीढ़ी से साफ और सुन्दर धरती को छीनने का हमें कोई अधिकार नहीं है।”  भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ऐसे प्रयास किये हैं जिनके चलते अब ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े मुद्दे पर वह नेतृत्व करने की स्थिति में है।

संयुक्त राष्ट्र विस्तार अभियान का नेतृत्व कर रहा भारत
भारत हमेशा से विश्व शांति का सबसे बड़ा पैरोकार रहा है। यूनाइटेड नेशन ने भी माना है कि इस दिशा में भारत का प्रयास अन्य देशों की तुलना में ज्यादा है। भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्य के रूप में हमेशा विस्तार और सुधार की आवश्यकता को लेकर आवाज बुलंद करता रहा है। लेकिन अब  संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता को लेकर भारत को एक कामयाबी हाथ लगी है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा ने नवंबर में सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के लिए लिखित समझौता वार्ता का निर्णय लिया है। यह कहना गलत नहीं होगा कि लिखित बातचीत की शुरुआत इस दिशा में कुछ प्रगति है।

 

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की दावेदारी बड़े ही दमदार तरीके से रखी है। भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। भारत एक जिम्मेदार परमाणु शक्ति होने के साथ ही दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बीते साढ़े तीन वर्षों में जिस तरीके से दुनिया में भारत की धाक जमाई है उससे भारत की दावेदारी मजबूत हुई है। इतना ही नहीं सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई सदस्य देशों में भी चीन को छोड़ लगभग सभी देश भारत की दावेदारी को अहम मान रहे हैं, वहीं दुनिया के 170 से अधिक देश भी भारत की इस मांग के साथ खड़े हैं। 

अफ्रीकी देशों के बीच बड़े भाई की भूमिका में आया भारत
भारत का अफ्रीकी देशों से संबंध और भी प्रगाढ़ हो रहा है। पिछले कुछ सालों से भारत अफ्रीकी महाद्वीप के देशों के बीच अपना संबंध मजूबत करने कि हर कोशिश कर रहा है। साल 2015 में भारत ने भारत-अफ्रीका फोरम के सम्मेलन का किया था, जिसमें 41 देशों के नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 2017 में अफ्रीकी विकास बैंक समूह का 52वां वार्षिक सम्मेलन गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 81 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।

दरअसल पीएम मोदी का मनना है कि अफ्रीका वैश्विक कृषि पावरहाउस बनने की क्षमता रखता है और अगली हरित क्रांति का आगाज कर सकता है। गौरतलब है कि विश्व का 65 प्रतिशत से ज्यादा कृषि योग्य भूमि और 15 से 35 वर्ष की आयु के बीच की 42 करोड़ आबादी इसके लिए अनुकूल परिस्थिति है

पड़ोसी देशों से सबका साथ, सबका विकास कर रहा भारत
‘सबका साथ सबका विकास’ यह वह नारा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालते ही अपनी विदेश नीति का भी मूल-मंत्र माना था। उनके अब तक के कार्यकाल में हुए निरंतर प्रयासों से अनेक बार यह बात सिद्ध भी हो चुकी है, जिसमें उन्होंने अपने देश के हित के साथ, अपने पड़ोसी देशों के हितों को भी संवेदनशील दृष्टि से देखा।प्रधानमंत्री मोदी ने देश की कमान संभाली तो अपने पड़ोसी देशों से संबंध सुधारने शुरू किए। नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, बांग्लादेश जैसे देशों के दौरे किए और सह अस्तित्व के सिद्धांत को अपनाते हुए अपन नीतियां बनाई। सार्क सेटेलाइट हो या फिर संयुक्त पावरग्रिड बनाने की योजना हो, ये सभी पीएम मोदी की इंडिया फर्स्ट के साथ नेबरहुड मस्ट पॉलिसी के तहत है।

आसियान देशों के साथ विकास की बुनियाद रख रहा भारत
26 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली के राजपथ पर विश्व ने एक और अनोखा दृश्य तब देखा जब आसियान देशों के 10 राष्ट्राध्यक्ष भारत की जमीन पर एक साथ दिखे। थाइलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस, सिंगापुर, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस और ब्रुनेई आसियान के नेताओं ने भारत को अपनी इस इच्छा से अवगत कराया है कि रणनीतिक तौर पर अहम भारत-प्रशांत क्षेत्र में ज्यादा मुखर भूमिका निभाए। साफ है कि आसियान देशों के नेताओं का पीएम मोदी पर भरोसा व्यक्त किया जाना विश्व राजनीति में भारत के दबदबे को दिखा रहा है, वहीं आर्थिक विकास की नई राह खोल रहा है।

अमेरिका-रूस को एक साथ साध पाने में सफल हुआ भारत
अमेरिका और रुस की अदावत सभी जानते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की के कूटनीतिक कौशल के कारण आज दोनों ही देश भारत के साथ खड़े दिखते हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में जिस तरह से रुस ने भारत का साथ देते हुए चीन की हेकड़ी गुम कर दी वह काबिले तारीफ है। ठीक इसी तरह पाकिस्तान परस्त रहे अमेरिका को भारत की तरफ ले आना भी बड़ी बात है। आज अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने भारत से दोस्ती की खातिर आज पाकिस्तान को हर मंच पर अकेला छोड़ दिया है।

आतंकवाद पर विश्व जनमत बनाने में कामयाब रहा भारत
प्रधानमंत्री मोदी की सत्ता संभालने से पहले तक दुनिया में आतंकवाद को दो नजरिये से देखा जाता था। एक अच्छा आतंकवाद और दूसरा बुरा। हर तरह के आतंकवाद झेल रहे भारत ने दुनिया में इस फर्क को देखने के नजरिये में बदलाव किया। दुनिया अब हर तरह के आतंकवाद की निंदा करती है और उसे काउंटर करने के लिए कार्रवाई कर रही है। 

योग सूत्र से विश्व को एकजुट करने में सफल हो रहा भारत
पूरे विश्व को एक सूत्र में जोड़े रखने की योग शक्ति को तब नया मुकाम मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने हर वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। भारत में जन्मी योग पद्धति के चाहने वाले पूरी दुनिया में हैं। आधुनिकता के साथ अध्यात्म का मोदी मंत्र दुनिया के देशों को भी भाया और इसी कारण पीएम मोदी की पहल को 192 देशों का समर्थन मिला। 177 देश योग के सह प्रायोजक के तौर पर इस आयोजन से जुड़ भी गए। 21 जून 2015 को विश्व के अलग-अलग देशों में योग दिवस का भव्य आयोजन किया गया और पूरी दुनिया योग शक्ति से आपस में जुड़ी हुई महसूस होने लगी।।

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