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भारत-रूस में दोस्ती और सहयोग तेजी से बढ़ रहा: पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज रूस के व्लादिवोस्तोक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डेलीगेशन लेवल की बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान कहा दोनों देशों की दोस्ती और सहयोग का सफर तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति पुतिन, मेरे मित्र का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूं। और यह सुखद ऐतिहासिक संयोग है कि प्रेसिडेंट पुतिन और मेरे बीच भारत और रूस का बीसवां सालाना समिट हुआ है। साल 2001 में, जब भारत-रूस समिट पहली बार रूस में हुआ था, तब मेरे मित्र पुतिन रूस के राष्ट्रपति थे, और मैं अटल जी के साथ, उस समय के प्रधानमंत्री, गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर भारत के डेलिगेशन में था। राष्ट्रपति पुतिन की और मेरी इस राजनैतिक सहयात्रा के दौरान दोनों देशों की दोस्ती और सहयोग का सफर तेजी से आगे बढ़ा है।’

फाइल फोटो सन 2001
फाइल फोटो सन 2001

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इस दौरान हमारी Special and Privileged Strategic Partnership ना सिर्फ हमारे देशों के सामरिक हितों के काम आयी है। बल्कि इसे हमने लोगों के विकास और उनके सीधे फायदे से जोड़ा है। राष्ट्रपति पुतिन और मैं इस संबंध को विश्वास और भागीदारी के ज़रिये सहयोग की नयी ऊंचाईयों तक ले गए हैं। और इसकी उपलब्धियों में सिर्फ quantitative ही नहीं, qualitative बदलाव लाये हैं। पहला, हमने सहयोग को सरकारी दायरे से बाहर लाकर उसमें लोगों की, और प्राइवेट इंडस्ट्री की असीम ऊर्जा को जोड़ा है। आज हमारे सामने दर्जनों बिजनेस एग्रीमेंट हुए हैं।’

उन्होंने कहा, ‘रक्षा जैसे स्ट्रेटेजिक क्षेत्र में भी रूसी उपकरणों के स्पेयरपार्ट्स भारत में दोनों देशों के ज्वाइंट वेंचर द्वारा बनाने पर आज हुआ समझौता इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा। यह समझौता और इस साल के शुरू में AK-203 का ज्वाइंट वेंचर ऐसे कदम हैं जो हमारे रक्षा सहयोग को Buyer-Seller के सीमित परिवेश से बाहर co-manufacturing का ठोस आधार दे रहे हैं। भारत में रूस के सहयोग से बन रहे Nuclear Plants के बढ़ते localization से इस क्षेत्र में भी हमारे बीच सही मायनों में भागीदारी विकसित हो रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारे रिश्तों को हम राजधानियों के बाहर भारत के राज्यों और रूस के क्षेत्रों तक ले जा रहे हैं। यह कोई ताज्जुब की बात नहीं, क्योंकि एक ओर मैं लम्बे अरसे तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहा हूं। और राष्ट्रपति पुतिन भी रूस के regions की क्षमताओं और संभावनाओं को भली-भांती जानते हैं। इसलिए, यह नेचुरल है कि उन्होंने Eastern Economic Forum को conceive किया। और भारत जैसे विविधता भरे देश को इस के साथ नज़दीक से जोड़ने के महत्त्व को समझा। इसे जितना भी appreciate किया जाए, कम है।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘उनके निमंत्रण के तुरंत बाद हमने बहुत तेज तैयारी शुरू कर दी थी। इसके लिए भारत के Commerce Minister, 4 राज्यों के मुख्यमंत्री और डेढ़ सौ से अधिक Businessmen व्लादिवस्तोक आए। Far East के विशेष दूत और Far East के सभी 11 Governors से उनकी मुलाक़ातों के बहुत अच्छे परिणाम निकले हैं। राज्यों और क्षेत्रों के संबंधों को फ्रेमवर्क मिला। और कोयला, Diamond, Mining, rare earth, Agriculture, timber, Pulp & Paper तथा Tourism में अनेक नई संभावनाएं उजागर हुईं। और अब क्षेत्रों के बीच connectivity को बढ़ाने के लिए Chennai और Vladivostok के बीच maritime route का प्रस्ताव भी किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमने अपने bilateral cooperation को बहुत विविधता दी है और उसमें नए आयाम जोड़े हैं। आजकल हाईलाइट और हैडलाइन भारत और रूस के बीच तेल और गैस के सौदे नहीं, बल्कि दोनों के द्वारा एक दूसरे के Hydrocarbon sector में unprecedented निवेश है। इस Sector में सहयोग के लिए 5 साल का Roadmap, और Far East तथा आर्कटिक में Hydro-Carbon और LNG की खोज में सहयोग पर सहमती हुई है। Space में हमारा लंबा सहयोग नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। गगनयान, यानि भारतीय Human Space Flight के लिए भारत के Astronauts रूस में Training प्राप्त करेंगे। आपसी निवेश के पूरे potential को हासिल करने के लिए हमने जल्द ही investment protection agreement करने पर सहमत हुए हैं। भारत का ‘Russia Plus Desk’ और रूस की Far East Investment and Export Agency का मुंबई ऑफिस परस्पर इन्वेस्टमेंट को facilitate करेंगे।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमारी Strategic Partnership में भी नए अध्याय जुड़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच बहुत विशाल Tri-Services Exercise ‘Indra-2019’ हमारे और भी बढते हुए भरोसे और विश्वास का प्रतीक है। जब भी ज़रुरत होती है, भारत और रूस दुनिया के सामान्य स्थानों पर ही नहीं, Antarctica और Arctic में एक दूसरे के काम आते हैं। दोनों देश यह अच्छी तरह समझते हैं कि आज के युग में शान्ति और स्थायित्व के लिए Multi-polar world आवश्यक है। और इसके निर्माण में हमारे सहयोग और समन्वय की भूमिका महत्त्वपूर्ण रहेगी। इसीलिये, हम सहजता से BRICS, SCO और अन्य ग्लोबल फोरम में घनिष्ठ सहयोग करते हैं। आज हमने बहुत से प्रमुख Global और Regional Issues पर हमेशा की तरह खुल कर और सार्थक चर्चा की। भारत एक ऐसा अफगानिस्तान देखना चाहता है जो स्वतंत्र,सुरक्षित, अखंड, शांत और लोकतांत्रिक हो। हम दोनों ही किसी भी देश के आतंरिक मामलों में बाहरी दखल के खिलाफ हैं। हमने भारत के free, open और inclusive Indo-Pacific के concept पर भी उपयोगी चर्चा की। हम सहमत हैं कि Cyber Security, Counter-terrorism, environment protection जैसे क्षेत्रों में भारत और रूस का सहयोग और मज़बूत करेंगे। अगले साल भारत और रूस मिल कर टाइगर conservation पर High Level Forum का आयोजन करने के लिए सहमत हुए हैं।’

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