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पीएम किसान सम्मान निधि : अब तक 7.22 करोड़ से किसान परिवारों को मिले 34,173 करोड़ रुपये

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देशभर के किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प के साथ काम कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक 7.22 करोड़ किसान परिवारों को लाभ मिल चुका है। इस योजना के तहत 34,173 करोड़ रुपये किसानों के खातों में ट्रांसफर किये जा चुके हैं। केंद्र सरकार इस योजना के तहत प्रत्येक किसान को 6,000 रुपये की वार्षिक आर्थिक सहायता देती है। 

किसान पोर्टल की शुरूआत  

किसानों की आर्थिक हालत सुधारने के लिए मोदी सरकार ने पीएम-किसान सम्मान निधि देने की शुरुआत की है। कई राज्यों में किसानों को सम्मान निधि की रकम पाने के लिए परेशानी होती है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने ऐसी सुविधा दी है कि कोई भी किसान सीधे पोर्टल के जरिए अपनी रकम के बारे में पता कर सकता है। कृषि मंत्रालय के अनुसार पीएम किसान पोर्टल पर जाकर कोई भी किसान अपना आधार, मोबाइल और बैंक खाता नंबर दर्ज करके इसके स्टेटस की जानकारी ले सकता है। इतना ही नहीं अब इस योजना में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए किसानों को अधिकारियों के पास नहीं जाना पड़ेगा। कोई भी किसान इसके पोर्टल पर जाकर खुद ही अपना रजिस्ट्रेशन कर सकता है। इसका मकसद सभी किसानों को स्कीम से जोड़ना और रजिस्टर्ड लोगों को समय पर लाभ पहुंचाना है।

आपको बता दें कि इस साल 24 फरवरी 2019 को जब योजना शुरू हुई थी तो सिर्फ 12 करोड़ किसानों के लिए इसे लागू किया गया था। लेकिन दोबारा सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए यह स्कीम लागू कर दी है।

इसके पहले भी मोदी सरकार ने किसानों के लिए कई अन्य क्रांतिकारी कदम उठाए हैं, जिसने किसानों की छोटी से छोटी समस्याओं का समाधान किया है। आइए, सरकार के इन क्रांतिकारी कदमों के बारे में जानते हैं-

2020 तक सरकार के पास होगा डाटा बैंक
इस योजना के अनुसार 2020 तक सरकार के पास किसानों का एक बड़ा डाटा बैंक होगा। इस डाटा से अब मिट्टी की जांच हो या बाढ़ की चेतावनी, सेटेलाइट से प्राप्त तस्वीर से लेकर जमीन का राजस्व रिकॉर्ड जैसी तमाम सूचनाएं किसानों को घर बैठे ही मिल जाएंगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक अगले छह महीने में एक बार डाटाबेस बन जाने के बाद किसान बाजार की तमाम सूचनाएं ले सकेंगे। वास्तव में ग्रामीण क्षेत्र में यह एक गेम चेंजर साबित होने जा रहा है।’ 

पीएम-किसान सम्मान निधि से मिली प्रेरणा
इस योजना के तहत डाटा कलेक्ट करने की प्ररेणा पीएम मोदी की अति महत्वपूर्ण योजना पीएम-किसान सम्मान निधि से मिली है। गौरतलब है कि पीएम-किसान सम्मान निधि में एक किसान परिवार को सालाना 6,000 रुपये सीधा हस्तांतरण किया जा रहा है। तीन किस्तों में दी जा रही इस राशि का मकसद किसानों को खेती करने के लिए जरूरी पूंजी में मदद करना है। इस डाटा का मिलान पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम यानी पीएफएमएस द्वारा किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पैसा सही जगह पहुंचा है और किसानों के ही खाते में गया। सरकार ने अब तक देश के गरीब किसानों को पीएम-किसान सम्मान निधि के तहत 34,173 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

तीन लाख तक कर्ज लेने पर कोई शुल्क नहीं
अब किसानों को 3 लाख रुपये तक के कर्ज लेने की प्रक्रिया में कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। अब किसानों को प्रोसेसिंग, इंस्पेक्शन फीस या सर्विस चार्ज नहीं देना होगा। किसानों को कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर कर्ज लेने के दौरान किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना होगा। पहले ऋण मुहैया कराने से पहले प्रक्रिया या अन्य के नाम पर कुछ प्रतिशत तक किसानों से वसूला जाता था। आईबीए ने सभी बैंकों को निर्देश दिया है कि कोई भी शुल्क किसानों से तीन लाख रुपये तक कर्ज लेने में नहीं लिया जाएगा।

गायों के लिए राष्ट्रीय गोकुल योजना
इतना ही नहीं, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 2 प्रतिशत की छूट मिलेगी। सरकार ने पशुपालन और गो-संरक्षण के लिए बड़ी पहल की है। गांवों की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान निभाने वाली गायों के लिए राष्ट्रीय गोकुल योजना की शुरुआत की जाएगी। इसके तहत 750 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

प्याज की प्रोत्साहन राशि को किया दोगुना
मोदी सरकार ने प्‍याज उगाने वाले किसानों के लिए निर्यात-प्रोत्‍साहन राशि पहले के पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी है। घरेलू बाजारों में प्‍याज की आपूर्ति मांग से ज्यादा होने के कारण इसकी कीमत कम हो गई थी। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, इस स्थिति पर काबू पाने के लिए प्‍याज का निर्यात बढ़ाने का फैसला किया गया ताकि घरेलू बाजार में इसकी कीमत स्थिर हो सके। जुलाई 2018 से प्‍याज के निर्यात को प्रोत्‍साहन देने के लिए पांच प्रतिशत की छूट की घोषणा कर दी गई। इसका फायदा हुआ है कि प्‍याज सबसे अधिक निर्यात होने वाले कृषि उत्‍पादों में आ गया है।  

खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन

मोदी सरकार की नीतियों का ही असर है कि खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है और किसान खुशहाल हो रहा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि देश में वर्ष 2017-18 में 284.83 मिलियन टन अनाज का उत्‍पादन किया गया, जबकि 2010 से 2014 के बीच प्रति वर्ष 255.59 मिलियन टन का औसत उत्‍पादन हुआ था। इसी प्रकार वर्ष 2017-18 में दाल का 25.23 मिलियन टन उत्‍पादन हुआ है। 2010 से 2014 के बीच प्रतिवर्ष औसतन 18.01 मिलियन टन की तुलना में दाल उत्‍पादन में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बागवानी फसलों में रिकॉर्ड 15.79 प्रतिशत वृद्धि हुई, नीली क्रांति के अंतर्गत मछली उत्‍पादन 26.86 प्रतिशत बढ़ा और पशुपालन तथा दूध उत्‍पादन में 23.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

मोदी सरकार ने फसल उत्‍पादन लागत घटाने के लिए मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड, नीम कोटेड यूरिया के इस्‍तेमाल और प्रति बूंद अधिक फसल से संबंधित योजनाएं लक्षित रूप में लागू की हैं। जैव कृषि को प्रोत्‍साहित करने के लिए 2014-15 में परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) प्रारंभ की गई और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के लिए पूर्वोत्‍तर क्षेत्र मिशन ऑर्गेंनिक वेल्‍यू चेंज डेवलपमेंट (एमओवीसीडी-एनईआर) प्रारंभ किया गया। मोदी सरकार ने राष्‍ट्रीय कृषि बाजार (ई-नैम) प्रारंभ किया गया है ताकि एक देश एक बाजार की ओर बढ़ते हुए किसानों के उत्‍पाद के लिए लाभकारी मूल्‍य सुनिश्चित किया जा सके। 

लागत से डेढ़ गुना एमएसपी भरेगी नई रफ्तार

एक दशक पहले किसानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी देने का सुझाव स्वामीनाथन आयोग ने कांग्रेस की यूपीए सरकार को दिया था। लेकिन यूपीए सरकार इसे लागू करने का हिम्मत नहीं जुटा सकी। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों को हर हाल में खुशहाल करने के लिए लागत का डेढ़ गुना अधिक एमएसपी देने का निर्णय ले लिया, साथ में यह भी सुनिश्चिचत कर दिया कि एमएसपी से कम मूल्य मिलने पर किसानों के नुकसान की भरपाई सरकार करे।

मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जहां एक तरफ किसानों की आय बढ़ाने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ जन-जन को पोषक अनाज उपलब्ध कराने के लिए भी काम कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों और देश की सेहत के लिए पोषक मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए उपमिशन लागू कर दिया है। इसके तहत देश के 14 राज्यों के दो सौ से अधिक जिलों को चिन्हित मोटे अनाज वाली फसलों के लिए किसानों को सहायता दी गई। पिछले फसल वर्ष के दौरान रिकॉर्ड 4.70 करोड़ टन मोटे अनाज का उत्पादन हुआ । ये योजना उन किसानों के लिए फायदेमंद रही जहां ज्यादातर सूखा पड़ता है। मोटे अनाज की खेती में अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है।

उपज की उचित बिक्री के इंतजाम पर जोर
देश में 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे या सीमांत किसान हैं। इनके लिए मार्केट तक पहुंचना आसान नहीं है। इसलिए इन्हें ध्यान में रखते हुए मौजूदा सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर पर जोर है। इसके लिए सरकार 22 हजार ग्रामीण हॉट को ग्रामीण कृषि बाजार में बदलने की तैयारी चल रही है जिसके बाद इन्हें APMC और e-NAM प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट कर दिया जाएगा। 2,000 करोड़ रुपये से कृषि बाजार और संरचना कोष का गठन होगा। e-NAM को किसानों से जोड़ा गया है, ताकि किसानों को उनकी उपज का ज्यादा मूल्य मिल सके। अब तक देश की लगभग 585 मंडियों को ऑनलाइन जोड़ा जा चुका है।

किसान संपदा योजना से सप्लाई चेन को मजबूती
मोदी सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के जरिए खेत से लेकर बाजार तक पूरी सप्लाई चेन को मजबूत कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना शुरू की गई जिसका उद्देश्य कृषि उत्पादों की कमियों को पूरा करना, खाद्य प्रसंस्करण का आधुनिकीकरण करना है। 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से वर्ष 2019-20 तक करीब 334 लाख मीट्रिक टन कृषि उत्पादों का संचय किया जा सकेगा। इससे देश के 20 लाख किसानों को लाभ होगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी निकलने वाले हैं। गौर करने वाली बात है कि इस योजना को फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में 100 प्रतिशत FDI के सरकार के फैसले से भी नया बल मिला है।

गन्ना किसानों के लिए राहत पैकेज

एक तरफ जहां मोदी सरकार 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कृषि में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में शिद्दत से लगी है। मोदी सरकार ने हाल ही में देश के गन्ना किसानों को राहत देने के लिए पैकेज का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमत बढ़ाए बगैर किसानों को बड़ी राहत पहुंचाई जाएगी। गन्ना किसानों के लिए राहत पैकेज में चीनी का 30 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की गई। 

दशकों पुरानी समस्याएं खत्म करने के लिए उठाए कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की समस्याओं के समाधान को निश्चित समय में लागू करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। कांग्रेस की सरकारों में किसानों के लिए पानी, बिजली, खाद आदि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए योजनाएं तो बनीं, लेकिन उनके क्रियान्वयन की समयसीमा को निश्चित नहीं किया गया, इसका परिणाम यह हुआ कि समस्या हमेशा बनी ही रही। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके विपरीत किसानों की पानी, बिजली, बीज, खाद, कृषि से जुड़े अन्य धंधों, बाजार, बीमा आदि से जुड़ी योजनाओं को निश्चित समय में लागू करने निर्णय लिया। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश के किसानों की आय को 2022 तक दोगुना कर देंगे। किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए, आय दोगुनी करने का संकल्प मोदी सरकार से पहले इस देश में किसी सरकार ने नहीं लिया।

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