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मोदी सरकार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बहुत सशक्त हुआ भारत

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मोदी सरकार ने पिछले तीन सालों में वैज्ञानिक पटल को देश के विकास की जरूरतों को पूरा करने के विजन के साथ जोड़ दिया है। रक्षा क्षेत्र से लेकर कृषि क्षेत्र में नवाचार और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में रिसर्च को मजबूत किया गया है। मोदी सरकार की नीतियों का नतीजा है कि देश में विदेशों में काम करने वाले लगभग 1000 वैज्ञानिक भारतीय संस्थानों से जुड़ने वाले हैं और इस साल देश में कम से कम 6 और सुपर कंप्यूटर स्थापित कर लिए जाएंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछले तीन सालों में शुरू की गई कुछ योजनाओं और उनसे हुए देश को लाभ इस प्रकार से हैं-

‘टेक्नोलॉजी विजन 2035’
मैसूर में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अधिवेशन में 03 जनवरी 2016 को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को ‘टेक्नोलॉजी विजन 2035’ दिया। ये 2035 तक देश को जिस तरह की तकनीक और वैज्ञानिक दक्षता की आवश्यकता होगी उसे प्राप्त करने की एक विस्तृत रूपरेखा है। इस विजन में 12 क्षेत्रों पर विशेष रूप से काम किये जाने पर जोर दिया गया है, इनमें से प्रमुख हैं- शिक्षा, चिकित्सा और स्वास्थ्य, खाद्य और कृषि, जल, ऊर्जा, पर्यावरण और यातायात। इसी विजन को ध्यान में रखते हुए कई सारी योजनाओं और नीतियों को सरकार लागू कर रही है।

National Initiative for Development and Harnessing Innovations (NIDHI)
ये देश में स्टार्टअप के तहत नवाचार के तंत्र को मजबूत करने के लिए खोज से लेकर उत्पाद को बाजार में लाने तक की पूरी प्रक्रिया में मदद करता है। इसके लिए 90 करोड़ रुपये की लागत से आईआईटी गांधीनगर में एक अनुसंधान पार्क की स्थापना की गई है।

Visiting Advanced Joint Research
देश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मानित फैक्लटी को सहायक या विजटिंग फैक्लटी के रूप में भारतीय संस्थानों में छात्रों को गाइड करने की योजना है। ये साल में एक से तीन महीने के लिए हो सकता है। यह योजना इसी वर्ष जनवरी में शुरू की गई है। 2017-18 के लिए ऐसे 1000 फैक्लटी को देश के संस्थानों से जोड़ने की तैयारी हो चुकी है। इस योजना को विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड (SERB) ने शुरु किया है।

Pravasi doctoral fellowship scheme
SERB ने देश के युवा शोध छात्रों को रिसर्च में प्रशिक्षण के लिए विदेशी संस्थान में भेजने के लिए यह योजना तैयार की है। इसके लिए छात्रों को एक साल की फेलोशिप देने की योजना है।

KIRAN (Knowledge Involvement in Research Advancement through Nurturing)
देश में महिला वैज्ञानिकों को सही माहौल देने और उन्हें शोध में आगे बढ़ाने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई। महिला वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को आधारभूत या अप्‍लाइड साइंस में शोध करने के अवसर देने के लिए 227 परियोजनाओं का चुनाव किया गया है। इस योजना के तहत महिला वैज्ञानिकों को 29 परियोजनाओं में सहायता दी जा रही है।

जेके अरोमा आरोग्य ग्राम
CSIR ने जेके अरोमा आरोग्य ग्राम परियोजना शुरू की है। इसके तहत किसानों को जड़ी-बूटियों की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के 14 गांवों में ये परियोजना चल रही है।

देवस्‍थल ऑप्टिकल टेलीस्‍कोप
एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन ‘आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान’ (एरीज) 30 मार्च 2016 को चालू हो गया। नैनीताल के पास देवस्थल में यह दूरबीन स्थित है। एशिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी प्रकाशीय दूरबीन ‘एरीज’ भारत और बेल्जियम की साझेदारी से बना है। इसका उपयोग तारों की संरचनाओं और उनके चुंबकीय क्षेत्र की संरचनाओं का अध्ययन करने में किया जा रहा है।

राष्ट्रीय सुपर कम्प्यूटिंग मिशन
25 मार्च, 2015 को राष्ट्रीय सुपर कम्प्यूटिंग मिशन की शुरुआत हुई । इस कार्यक्रम के तहत भारत को विश्व स्तरीय कम्प्यूटिंग शक्ति बनाने का लक्ष्य है। इस मिशन को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग कार्यान्वित कर रहे हैं। 7 वर्षो के दौरान इसकी अनुमानित लागत 4,500 करोड़ रुपये है। 2017 में देश में 6 सुपर कंप्यूटर लगाने की योजना है।

SATYAM
योग एवं ध्यान के क्षेत्र में रिसर्च शुरू करने के लिए 2015-16 में एक नया कार्यक्रम science and technology of yoga and meditation (SATYAM) शुरू किया गया। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के निपटारे के लिए योग और ध्यान को बेहतरीन उपचार के रूप में स्वीकार किया गया है। SATYAM इसी दिशा में काम कर रहा है। इसके अलावा इस परियोजना के तहत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर योग और ध्यान के प्रभाव पर भी रिसर्च हो रहा है।

रेलवे के साथ विकास पहल
रेलवे की परियोजनाओं को 3 से 5 साल में पूरा करने के लिए रेल मंत्रालय के साथ मिलकर विभिन्न संस्थानों में रिसर्च का काम चल रहा है, इसकी शुरुआत 8 सितंबर 2015 को हुई थी।

सूर्य ज्‍योति
देश में यह एक सरल तकनीक विकसित की गई है जिससे उन स्थानों पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी जहां पर आज बिजली नहीं है। इस Photovoltaic integrated micro solar dome के माध्यम से सौर ऊर्जा की मदद से उन क्षेत्रों को भी रोशन करने की योजना है।

Mobile RO Unit
देश में पीने के जल को प्रदूषण मुक्त करके करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने में इस Mobile RO Unit का बहुत बड़ा योगदान है। इसे देश में ही विकसित किया जा रहा है।

पोर्टेबल वॉटर प्‍यूरिफिकेशन के लिए प्‍लाज्‍मा प्रणाली
CEERI ने पिलानी में जल को शुद्ध करने के लिए प्लाज्मा प्रणाली आधरित डाई इलेक्ट्रिक बेरियर डिस्चार्ज तकनीक विकसित की है।

एयरोस्पेस तकनीकों का विकास
CSIR ने भारतीय मौसम विभाग के साथ मिलकर ऐसी प्रणाली तैयार की है, जिसके जरिये पाइलटों को सुरक्षित उड़ान भरने और विमान उतारने में सुविधा होती है। इस तरह की प्रणालियां भारतीय हवाई अड्डों पर लगायी जा रही हैं।

जायरोट्रॉन का निर्णाण
CSIR, ISRO और DAI का मिलना देश के रणनीतिक क्षेत्र के लिए बहुत फायदेमंद साबित हुआ है। परमाणु क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाला जायरोट्रॉन पहले आयात किया जाता था। इसे बनाने वाले देश अमेरिका, रूस, जापान और यूरोपीय संघ, इसकी तकनीक का खुलासा नहीं करते थे। अब यह देश में ही विकसित किया जा चुका है। इसे गांधीनगर स्थित प्लाजमा अनुसंधान संस्थान में तैयार किया गया है। CSIR ने ‘ध्वनि’ का विकास भी किया है जिसके तहत सटीक निशाना लगाने के लिए प्रणाली तैयार की गई है। इसे भारतीय सेना में तैनात किया जाएगा।

BGR-34 का निर्माण
स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी CSIR के प्रयास सराहनीय हैं। उसने BGR-34 नामक मधुमेह की दवा बनायी है, जिसमें जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया। CSIR ने पारंपरिक जड़ी-बूटी से बनने वाली अन्य दवाओं को भी विकसित किया है। जम्मू में CSIR की एक शाखा में इस तरह की दवाएं बनाने और उनकी पैकेजिंग की सुविधा शुरू की गई है। इससे भारत में जड़ी-बूटी से बनने वाली दवाओं का विकास होगा और उन्हें अमेरिका तथा यूरोपीय बाजारों में निर्यात किया जा सकता है। CSIR ने अश्वगंधा और NMITLI-101 की ऐसी किस्में विकसित की हैं, जिनकी उपज बहुत अधिक होती है।

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