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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सुदृढ़ हो रही देश की अर्थव्यवस्था

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26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी तब देश की अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही थी। 4.4 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ रही इंडियन इकोनॉमी खस्ताहाल थी। लेकिन प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था में नयी जान डाल दी है। उनकी भारत माता के प्रति समर्पण, दूरदर्शी नीति, कड़ी मेहनत और लगन से आज देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में अग्रसर है। निर्यात में वृद्धि, विनिर्माण में वृद्धि, शेयर बाजार में वृद्धि, व्यापार संतुलन के साथ विदेशी ऋण में हो रही घटोतरी जैसे कुछ मानक हैं जो भारतीय अर्थव्यवस्था की सही गति को दर्शाते हैं।

मोदी विदेशी ऋण में कमी के लिए चित्र परिणाम

सितंबर में निर्यात 26 प्रतिशत बढ़ा
देश का निर्यात सितंबर में 25.67 प्रतिशत बढ़कर 28.61 अरब डॉलर रहा। केमिकल, पेट्रोलियम और इंजिनियरिंग उत्पादों के बेहतर प्रदर्शन से निर्यात में छह महीने में सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह मार्च 2017 के बाद सर्वाधिक निर्यात वृद्धि है। उस समय इसमें 27.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 13 अक्टूबर को जारी आंकड़े के अनुसार आयात भी सितंबर महीने में 18.09 प्रतिशत बढ़कर 37.6 अरब डॉलर हो गया। एक साल पहले इसी महीने में यह 31.83 अरब डॉलर था। भारतीय निर्यात संगठनों के परिसंघ (FIEO) ने कहा कि आने वाले महीनों में निर्यात में और वृद्धि होगी क्योंकि सरकार ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़ी उनकी चिंताओं को दूर कर दिया है।

बिजनेस एक्टिविटीज में सुधार के संकेत
सितंबर में लगातार दूसरे महीने भारत में मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। उत्पादन और नए ऑर्डर्स में बढ़ोत्तरी से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा मिला। निक्केई इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर में 51.2 अंक रहा। अगस्त के आंकड़ों के मुकाबले इसमें मामूली बदलाव दिखा। इससे जीएसटी रेजीम लागू होने के बाद कमर्शियल एक्टिविटीज में सुधार जारी रहने के संकेत मिले हैं। इसके साथ ही नये बिजनेस ऑर्डर मिलने से भारतीय मैन्युफैक्चर्स ने अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है और इसकी गति अक्टूबर 2012 के बाद सबसे ज्यादा तेज देखी गई है।

पैसेंजर व्‍हीकल्‍स की सेल 11.3% बढ़ी
वार्षिक आधार पर सि‍तंबर 2017 में पैसेंजर व्‍हीकल्‍स की बिक्री 11.3 प्रतिशत बढ़ी है। सोसाइटी ऑफ इंडि‍यन ऑटोमोबाइल मैन्‍युफैक्‍चरर्स (सिआम) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सि‍तंबर में पैसेंजर कारों की सेल्‍स 3,09,955 यूनि‍ट्स रही। वहीं, सितंबर 2017 में यूटि‍लि‍टी व्‍हीकल्‍स की बिक्री वार्षिक आधार पर 26.2 प्रतिशत बढ़ गई। कमर्शि‍यल व्‍हीकल्‍स की बिक्री भी 6 साल के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गई है। मोटरसाइकि‍ल की बिक्री पि‍छले साल की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक हुई है। सि‍तंबर में LCV सेगमेंट की बिक्री वार्षिक आधार पर 25.1 प्रतिशत अधिक है। जबकि टोटल व्‍हीकल एक्‍सपोर्ट्स भी सालाना आधार पर 12.7 प्रतिशत बढ़ी।

modi car manufacturing के लिए चित्र परिणाम

भारतीय Manufacturers का उत्पादन बढ़ा
भारत के फैक्ट्री ऐक्टिविटी के उत्पादन में अक्टूबर महीने में तेजी रही। एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) अक्टूबर में 51.6 पर रहा जो सितंबर में नौ महीने के न्यूनतम स्तर 51 पर था। जोरदार मांग की खबर के बीच अक्टूबर में लगातार 20वें महीने भारतीय विनिर्माताओं का उत्पादन बढ़ा। दरअसल सूचकांक का 50 से ऊपर रहना यह स्पष्ट करता है कि इस क्षेत्र में विस्तार हो रहा है। गौरतलब है कि अधिक उत्पादन और विशेष तौर पर विदेशी ग्राहकों की ओर से नए ऑर्डर में बढ़ोतरी के कारण मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी में थोड़ी तेजी आई है।

शेयर बाजार का शानदार सेलिब्रेशन
13 जुलाई, 2017 को मोदी सरकार में एक और रिकॉर्ड तब बना जब शेयर बाजार के इतिहास में सेंसेक्स पहली बार 32000 और निफ्टी 9850 के पार पहुंच गया। 16 अक्टूबर को निफ्टी ने पहली बार 10200 के स्तर को पार किया और 10231 पर बंद हुआ। 16 अक्टूबर को ही बाजार में चौतरफा खरीदारी के कारण सेंसेक्स भी नये ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने में सफल हुआ। सेंसेक्स ने 32, 687 अंकों के साथ नया रिकॉर्ड बनाया। दरअसल यह भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशकों के भरोसे को दिखाता है और पीएम मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था दीपावली का सेलिब्रेशन मना रही है।

व्यापार संतुलन की ओर इंडियन इकोनॉमी
सितंबर महीने में व्यापार घाटा 8.98 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष के इसी महीने के 9 अरब डॉलर के लगभग बराबर है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2013-14 में अनुमानित व्‍यापार घाटा 62448.16 मिलियन अमरीकी डॉलर का था, वहीं अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। जबकि अप्रैल-जनवरी 2015-16 में यह 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से भी 29.7 प्रतिशत कम है। यानी व्यापार संतुलन की दृष्टि से भी मोदी सरकार में स्थिति लगातार बेहतर होती जा रही है और 2013-14 की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक सुधार आया है।

विदेशी ऋण में कमी से आर्थिक हालात बेहतर
केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत का विदेशी ऋण 13.1 अरब डॉलर यानि 2.7% घटकर 471.9 अरब डॉलर रह गया है। यह आंकड़ा मार्च, 2017 तक का है। इसके पीछे प्रमुख वजह प्रवासी भारतीय जमा और वाणिज्यिक कर्ज उठाव में गिरावट आना है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च, 2017 के अंत में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और विदेशी ऋण का अनुपात घटकर 20.2% रह गया, जो मार्च 2016 की समाप्ति पर 23.5% था। इसके साथ ही लॉन्ग टर्म विदेशी कर्ज 383.9 अरब डॉलर रहा है जो पिछले साल के मुकाबले 4.4% कम है।

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